ajeeb rang tire husn ka lagaav men tha | अजीब रंग तिरे हुस्न का लगाव में था

  - Ahmad Nadeem Qasmi
अजीबरंगतिरेहुस्नकालगावमेंथा
गुलाबजैसेकड़ीधूपकेअलावमेंथा
हैजिसकीयादमिरीफ़र्द-ए-जुर्मकीसुर्ख़ी
उसीकाअक्समिरेएकएकघावमेंथा
यहाँवहाँसेकिनारेमुझेबुलातेरहे
मगरमैंवक़्तकादरियाथाऔरबहावमेंथा
उरूस-ए-गुलकोसबाजैसेगुदगुदाकेचली
कुछऐसाप्यारकाआलमतिरेसुभावमेंथा
मैंपुर-सुकूँहूँमगरमेरादिलहीजानताहै
जोइंतिशारमोहब्बतकेरख-रखावमेंथा
ग़ज़लकेरूपमेंतहज़ीबगारहीथी'नदीम'
मिराकमालमिरेफ़नकेइसरचावमेंथा
  - Ahmad Nadeem Qasmi
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