raqs-e-sharar kya ab ke vahshat-naak hua | रक़्स-ए-शरर क्या अब के वहशत-नाक हुआ

  - Ahmad Mahfuz
रक़्स-ए-शररक्याअबकेवहशत-नाकहुआ
जलतेजलतेसबकुछजलकरख़ाकहुआ
सबकोअपनीअपनीपड़ीथीपूछतेक्या
कौनवहाँबचनिकलाकौनहलाकहुआ
मौसम-ए-गुलसेफ़स्ल-ए-ख़िज़ाँकीदूरीक्या
आँखझपकतेसाराक़िस्सापाकहुआ
किनरंगोंइससूरतकीता'बीरकरूँँ
ख़्वाब-नदीमेंइकशोलापैराकहुआ
नादाँकोआईनाहीअय्यारकरे
ख़ुदमेंहोकरवोकैसाचालाकहुआ
तारीकीकेरातअज़ाबहीक्याकमथे
दिननिकलातोसूरजभीसफ़्फ़ाकहुआ
दिलकीआँखेंखोलकेराहचलो'महफ़ूज़'
देखोक्याक्याआलमज़ेर-ए-ख़ाकहुआ
  - Ahmad Mahfuz
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