savaad-e-shaam na rang-e-sehar ko dekhte hain | सवाद-ए-शाम न रंग-ए-सहर को देखते हैं

  - Ahmad Mahfuz
सवाद-ए-शामरंग-ए-सहरकोदेखतेहैं
बसइकसितारा-ए-वहशत-असरकोदेखतेहैं
किसीकेआनेकीजिससेख़बरभीआतीनहीं
जानेकबसेउसीरहगुज़रकोदेखतेहैं
ख़ुदा-गवाहकिआईना-ए-नफ़सहीमेंहम
ख़ुदअपनीज़िंदगी-ए-मुख़्तसरकोदेखतेहैं
तोक्याबसएकठिकानावहीहैदुनियामें
वोदरनहींतोकिसीऔरदरकोदेखतेहैं
सुनाहैशहरकानक़्शाबदलगया'महफ़ूज़'
तोचलकेहमभीज़राअपनेघरकोदेखतेहैं
  - Ahmad Mahfuz
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