ye taalluq tiri pahchaan banaa saka tha | ये त'अल्लुक़ तिरी पहचान बना सकता था

  - Ahmad Khayal
येत'अल्लुक़तिरीपहचानबनासकताथा
तूमिरेसाथबहुतनामकमासकताथा
येभीएजाज़मुझेइश्क़नेबख़्शाथाकभी
उसकीआवाज़सेमैंदीपजलासकताथा
मैंनेबाज़ारमेंइकबारज़ियाबाँटीथी
मेराकिरदारमिरेहाथकटासकताथा
कुछमसाइलमुझेघररोकरहेहैंवर्ना
मैंभीमजनूँकीतरहख़ाकउड़ासकताथा
अबतोतिनकामुझेशहतीरसेभारीहै'ख़याल'
मैंकिसीवक़्तबहुतबोझउठासकताथा
  - Ahmad Khayal
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