बस्तीसेचंदरोज़किनाराकरूँँगामैं
वहशतकोजाकेदश्तमेंमाराकरूँँगामैं
वैसेतोयेज़मीनमिरेकामकीनहीं
लेकिनअबइसकेसाथगुज़ाराकरूँँगामैं
शायदकिइससेमुर्दासमुंदरमेंजानआए
सहरामेंकश्तियोंकोउताराकरूँँगामैं
मंज़रकारंगरंगनिगाहोंमेंआएगा
इकऐसेज़ाविएसेनज़ाराकरूँँगामैं
ऐमेहरबाँअजलमुझेकुछवक़्तचाहिए
जबजीभरातोतुमकोइशाराकरूँँगामैं