bastii se chand roz kinaara karunga main | बस्ती से चंद रोज़ किनारा करूँँगा मैं

  - Ahmad Khayal
बस्तीसेचंदरोज़किनाराकरूँँगामैं
वहशतकोजाकेदश्तमेंमाराकरूँँगामैं
वैसेतोयेज़मीनमिरेकामकीनहीं
लेकिनअबइसकेसाथगुज़ाराकरूँँगामैं
शायदकिइससेमुर्दासमुंदरमेंजानआए
सहरामेंकश्तियोंकोउताराकरूँँगामैं
मंज़रकारंगरंगनिगाहोंमेंआएगा
इकऐसेज़ाविएसेनज़ाराकरूँँगामैं
मेहरबाँअजलमुझेकुछवक़्तचाहिए
जबजीभरातोतुमकोइशाराकरूँँगामैं
  - Ahmad Khayal
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