dasht men waadi-e-shaadaab ko choo kar aaya | दश्त में वादी-ए-शादाब को छू कर आया

  - Ahmad Khayal
दश्तमेंवादी-ए-शादाबकोछूकरआया
मैंखुली-आँखहसींख़्वाबकोछूकरआया
उसकोछूकरमुझेमहसूसहुआहैऐसे
जैसेमैंरेशम-ओ-किम-ख़्वाबकोछूकरआया
मुझकोमालूमहैपोरोंकेदमकनेकाजवाज़
रातमैंख़्वाबमेंमहताबकोछूकरआया
जिस्मकेसाथमिरीरूहभीनमहोनेलगी
जबसेउसदीदा-ए-पुर-आबकोछूकरआया
रूहकीकाईइसीतौरसेछटनाथीसोमैं
सुब्ह-दममिम्बर-ओ-मेहराबकोछूकरआया
मुर्तइशकिरनोंकारक़्सएकघड़ीभीथमें
चाँदकिसतर्ज़केतालाबकोछूकरआया
  - Ahmad Khayal
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