jaane kaisa ye noor hai mujh men | जाने कैसा ये नूर है मुझ में

  - Ahmad Kamal Hashmi
जानेकैसायेनूरहैमुझमें
चाँदकोईज़रूरहैमुझमें
कोईपढ़तानहींकभीउसको
वोजोबैनस्सुतूरहैमुझमें
जानेकिसमेंहैआजिज़ीमेरी
जानेकिसकाग़ुरूरहैमुझमें
कहींबाहरनज़रनहींआता
मेरादुश्मनज़रूरहैमुझमें
किर्चियाँचुभरहीहैंसीनेमें
आइनाचूरचूरहैमुझमें
मुद्दतोंतकसफ़रमेंरहकरभी
कोईमंज़िलसेदूरहैमुझमें
मुंतज़िरहैकिसीतजल्लीका
एकजोकोह-ए-तूरहैमुझमें
मैंयेमहसूसकररहाहूँ'कमाल'
कोईमुझसेहीदूरहैमुझमें
  - Ahmad Kamal Hashmi
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