dara raha hai mujhe ek dar andhere men | डरा रहा है मुझे एक डर अँधेरे में

  - Ahmad Kamal Hashmi
डरारहाहैमुझेएकडरअँधेरेमें
बिछड़जाएकहींहम-सफ़रअँधेरेमें
उमडतीकालीघटाओंकोरोकनाहोगा
डूबजाएकहींदोपहरअँधेरेमें
करोमेरेलिएतुमकोईदियारौशन
मुझेअबआनेलगाहैनज़रअँधेरेमें
कईचराग़ोंनेऊधममचाईथीइकशब
तभीसेडूबगयाघरकाघरअँधेरेमें
वोअपनीज़ातमेंइकचाँदहैवक़्त-ए-सहर
मैंअपनीज़ातमेंजुगनूहूँपरअँधेरेमें
हरआदमीनिकलआताहैख़ोलसेबाहर
कोईभीरहतानहींमो'तबरअँधेरेमें
चराग़वालोंकेसबदा'वेखोखलेनिकले
मैंकररहाहूँमुसलसलसफ़रअँधेरेमें
'कमाल'डालदोतुमकूड़े-दानमेंउनको
चराग़जलतेनहींहैंअगरअँधेरेमें
  - Ahmad Kamal Hashmi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy