vo bujh gaya to andheron ko bhi malaal raha | वो बुझ गया तो अँधेरों को भी मलाल रहा

  - Ahmad Kamal Hashmi
वोबुझगयातोअँधेरोंकोभीमलालरहा
वोइकचराग़जोजलनेमेंभीबे-मिसालरहा
कभीभुलासकादिल-शिकस्तगीअपनी
जुड़ातोजुड़केभीउसआइनेमेंबालरहा
मिरीहयातनेहातिमबनादियामुझको
हरइकसवालकेबा'दइकनयासवालरहा
हमेशामैंनेभीनाकामियोंसेकामलिया
तमाम-उम्रमिरा'मीर'जैसाहालरहा
तुम्हारेबा'दकिसीसेफ़रेबखायानहीं
तुम्हारामुझसेबिछड़नाभीनेक-फ़ालरहा
ग़मोंकोहावीहोनेदियाकभीदिलपर
शब-ए-फ़िराक़भीज़िक्र-ए-शब-ए-विसालरहा
कहाँहरमहैकिधरका'बाहैकिधररुख़है
नमाज़-ए-इश्क़मेंउसकाकहाँख़यालरहा
ग़ज़लउसीकीथीहावीतमामग़ज़लोंपर
वहाँभीरौनक-ए-बज़्म-ए-सुख़न'कमाल'रहा
  - Ahmad Kamal Hashmi
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