nit-naye rang se karta raha dil ko paamaal | नित-नए रंग से करता रहा दिल को पामाल

  - Ahmad Hamdani
नित-नएरंगसेकरतारहादिलकोपामाल
बरबत-ए-जाँमेंसमायाहुआइकहुस्न-ए-मलाल
उम्रकाटीहैघनीछाँवमेंज़ुल्फ़ोंकीबहुत
आओअबरंजकीदहलीज़पेसज्देकुछसाल
वोबदनजिसकाउजालाथाहमारीजन्नत
ध्यानमेंउसकेहुएआजमगरकैसेनिढाल
गोरीबाहेंभीहमाइलरहाकरतीथींकभी
औरअबसरभीउठानाहुआज़ानूसेमुहाल
तूमुयस्सरथातोदिलमेंथेहज़ारोंअरमाँ
तूनहींहैतोहरइकसम्तअजबरंग-ए-मलाल
हरतरफ़अपनेअँधेराहीअँधेरालेकिन
आसमाँपरयेसितारोंकाचमकताहुआजाल
  - Ahmad Hamdani
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