yaad kya kya log dasht-e-be-karaan men aa.e the | याद क्या क्या लोग दश्त-ए-बे-कराँ में आए थे

  - Ahmad Hamdani
यादक्याक्यालोगदश्त-ए-बे-कराँमेंआएथे
रंगलेकिनकबयेचश्म-ए-ख़ूँ-फ़िशाँमेंआएथे
किसतमन्नासेतुम्हेंदेखाथाकिसचाहतसेहम
रक़्सकरतेहल्क़ा-ए-वारफ़्तगाँमेंआएथे
सूरतेंक्याक्यादिल-ए-आईना-गरमेंबसगईं
हमसेबे-सूरतभीतोबज़्म-ए-जहाँमेंआएथे
सादगीसेहमनेसमझाथाहमाराज़िक्रहै
तज़्किरेकुछऔरहीउनकेबयाँमेंआएथे
हरनईमुश्किलपेहमसोचाकिएहैंदेरतक
लोगपहलेभीतोकुछशहर-ए-बुताँमेंआएथे
येगुल-ए-तरकीसीख़ुश्बूकिसतरफ़सेगई
हमबगूलेथेभलाकबगुलिस्ताँमेंआएथे
क्यूँँहमारेसाँसभीहोतेहैंलोगोंपरगिराँ
हमभीतोइकउम्रलेकरइसजहाँमेंआएथे
  - Ahmad Hamdani
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