bhatkte firte hain shehr-e-wafa se nikle hue | भटकते फिरते हैं शहर-ए-वफ़ा से निकले हुए

  - Ahmad Azeem
भटकतेफिरतेहैंशहर-ए-वफ़ासेनिकलेहुए
बहुतमलूलहैंकू-ए-वफ़ासेनिकलेहुए
तिलिस्म-ए-आबसबात-ए-गुलाबअक्स-ए-चराग़
तमामरंगहैंतेरीक़बासनिकलेहुए
बलाएँफिरतीहैंख़ालीमकानमेंशायद
पड़ेहैंदूरदरीचेहवासेनिकलेहुए
नवामेंकर्बवहीदिलकीवहशतेंभीवही
गोएकउम्रहुईहैबलासेनिकलेहुए
अबइंतिज़ारयहीहैकिराखउड़जाए
झुलसझुलसगएशो'लेनवासेनिकलेहुए
  - Ahmad Azeem
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