zakham ko maat kyun nahin karte | ज़ख़्म को मात क्यूँँ नहीं करते

  - Ahmad Ameer Pasha
ज़ख़्मकोमातक्यूँँनहींकरते
दर्दख़ैरातक्यूँँनहींकरते
रास्तेसाएँसाएँकरतेहैं
रास्तेबातक्यूँँनहींकरते
प्यारकरतेहोपागलोंकीतरह
हस्ब-ए-औक़ातक्यूँँनहींकरते
उल्टीसीधीवज़ाहतेंक्याहैं
सोचकरबातक्यूँँनहींकरते
अबमुलाक़ातकरनाआसाँहै
अबमुलाक़ातक्यूँँनहींकरते
मैंतुम्हेंजीतनेकीधुनमेंहूँ
तुममुझेमातक्यूँँनहींकरते
  - Ahmad Ameer Pasha
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