KHaamushi men hi la-jawaab na tha | ख़ामुशी में ही ला-जवाब न था

  - Ahmad Ameer Pasha
ख़ामुशीमेंहीला-जवाबथा
मुस्कुराहटकाभीहिसाबथा
मैंउसेहर्फ़हर्फ़पढ़तागया
वोअगरचेखुलीकिताबथा
एकमुद्दतसेसोरहेहैंलोग
फिरभीआँखोंमेंकोईख़्वाबथा
झीलमेंरातभरथाक्यारक़्साँ
तेरापैकरतोज़ेर-ए-आबथा
मरनेवालोंकीथीजज़ाकीवईद
जीनेवालोंकाएहतिसाबथा
ज़र्फ़केइम्तिहाँमेंअबकीबार
एकभीशख़्सकामयाबथा
यूँँतोबेहदसख़ीथादिलका'अमीर'
वोमगरसाहब-ए-निसाबथा
  - Ahmad Ameer Pasha
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