ek aalam pe baar hain ham log | एक आलम पे बार हैं हम लोग

  - Ahmad Ameer Pasha
एकआलमपेबारहैंहमलोग
आदतनसोगवारहैंहमलोग
गर्दिश-ए-पाजुनूँबढ़ातीहै
संग-ए-रहकीपुकारहैंहमलोग
पिछलीसबरंजिशोंकोभूलभीजा
अबतिरेग़म-गुसारहैंहमलोग
जानतेहैंहुनरमोहब्बतका
अहल-ए-दिलमेंशुमारहैंहमलोग
अबहमेंलोगहँसकेमिलतेहैं
अबबहुतसाज़गारहैंहमलोग
हमनेमफ़्हूमकोज़बाँदीहै
हर्फ़काए'तिबारहैंहमलोग
कोईचेहरातोरौशनीलाए
वाहिमोंकाशिकारहैंहमलोग
अबतिरीदोस्तीकेक़ाबिलहैं
दिल-गिरफ़्ता-ओ-दिल-फ़िगारहैंहमलोग
दिलचुरानेकाकामकरतेहैं
बर-सर-ए-रोज़गारहैंहमलोग
एकपलभीसुकूँनहींमिलता
किसक़दरबे-क़रारहैंहमलोग
शहरयारीभीइकनशाहै'अमीर'
तेरेहिस्सेकाप्यारहैंहमलोग
  - Ahmad Ameer Pasha
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