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Agnivendra Singh
kuchh ziyaada aziz tha mujhko
kuchh ziyaada aziz tha mujhko | कुछ ज़ियादा अज़ीज़ था मुझको
- Agnivendra Singh
कुछ
ज़ियादा
अज़ीज़
था
मुझको
शख़्स
जो
मर
गया
कहानी
में
चाय
पीते
हैं
चाँद
तकते
हैं
खोए
रहते
हैं
रात
रानी
में
- Agnivendra Singh
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वही
लिखने
पढ़ने
का
शौक़
था,
वही
लिखने
पढ़ने
का
शौक़
है
तेरा
नाम
लिखना
किताब
पर,
तेरा
नाम
पढ़ना
किताब
में
Bashir Badr
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हम
तोहफ़े
में
घड़ियाँ
तो
दे
देते
हैं
एक
दूजे
को
वक़्त
नहीं
दे
पाते
हैं
आँखें
ब्लैक
एंड
व्हाइट
हैं
तो
फिर
इन
में
रंग
बिरंगे
ख़्वाब
कहाँ
से
आते
हैं?
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Fareeha Naqvi
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ये
यक़ीं
है
की
मेरी
उल्फ़त
का
होगा
उन
पर
असर
कभी
न
कभी
Anwar Taban
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जानिए
उस
से
निभेगी
किस
तरह
वो
ख़ुदा
है
मैं
तो
बंदा
भी
नहीं
Jaun Elia
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बंसी
सब
सुर
त्यागे
है,
एक
ही
सुर
में
बाजे
है
हाल
न
पूछो
मोहन
का,
सब
कुछ
राधे
राधे
है
Zubair Ali Tabish
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झिझकता
हूँ
उसे
इल्ज़ाम
देते
कोई
उम्मीद
अब
भी
रोकती
है
Shariq Kaifi
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हर
किसी
से
ही
मुहब्बत
माँगता
है
दिल
तो
अब
सब
सेे
अक़ीदत
माँगता
है
सीख
आया
है
सलीक़ा
ग़ुफ़्तगू
का
मुझ
सेे
मेरा
दोस्त
इज़्ज़त
माँगता
है
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ज़रा
नज़दीक
आकर
सुन
मेरी
इक
बात
ऐ
उर्दू
मेरी
तहरीर
बिन
तेरे
मुकम्मल
हो
नहीं
सकती
Avtar Singh Jasser
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जहाँ
से
लौटना
मुमकिन
नहीं
है
कुछ
ऐसे
मोड़
हैं
उसके
बदन
में
Siddharth Saaz
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अपनी
दीवानगी
से
डरता
हूँ
दिल
तो
होता
है
दिल
लगाने
को
Vikram Gaur Vairagi
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मुझे
बचने
का
कोई
डर
नहीं
है
मिरी
बस्ती
में
चारा-गर
नहीं
है
हमारा
रतजगा
अब
आदतन
है
सो
कमरे
में
कोई
बिस्तर
नहीं
है
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Agnivendra Singh
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ज़िन्दगी
में
सरा-ए-फ़ानी
में
आग
किसने
लगाई
पानी
में
कुछ
ज़ियादा
अज़ीज़
था
मुझको
शख़्स
जो
मर
गया
कहानी
में
चाय
पीते
हैं
चाँद
तकते
हैं
खोए
रहते
हैं
रात
रानी
में
ख़ुद-कुशी
का
ख़याल
आता
है
रोग
क्या
लग
गया
जवानी
में
रौशनी
को
तो
बुझना
होता
है
तीरगी
ही
है
ज़ाविदानी
में
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Agnivendra Singh
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हक़ीक़त
में
बहुत
आगे
खड़ा
है
वही
इक
शख़्स
जो
पीछे
खड़ा
है
किसी
भी
ग़ैर
के
पीछे
नहीं
हूँ
मिरा
साया
मिरे
आगे
खड़ा
है
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Agnivendra Singh
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अगर
नज़दीक
होता
प्यास
का
मसला
नहीं
होता
तुझे
मैं
चूम
लेता
फिर
कभी
प्यासा
नहीं
होता
Agnivendra Singh
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