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Afzal Sultanpuri
tum kahii jaao magar tum laut aanaa shaam tak
tum kahii jaao magar tum laut aanaa shaam tak | तुम कहीं जाओ मगर तुम लौट आना शाम तक
- Afzal Sultanpuri
तुम
कहीं
जाओ
मगर
तुम
लौट
आना
शाम
तक
क्या
करेगा
फिर
यहाँ
पर
ये
दीवाना
शाम
तक
- Afzal Sultanpuri
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था
इंतिज़ार
मनाएँगे
मिल
के
दीवाली
न
तुम
ही
लौट
के
आए
न
वक़्त-ए-शाम
हुआ
Aanis Moin
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नींद
आएगी
भला
कैसे
उसे
शाम
के
बा'द
रोटियाँ
भी
न
मुयस्सर
हों
जिसे
काम
के
बा'द
Azhar Iqbal
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ये
शाम
ख़ुशबू
पहन
के
तेरी
ढली
है
मुझ
में
जो
रेज़ा
रेज़ा
मैं
क़तरा
क़तरा
पिघल
रही
हूँ
ख़मोश
शब
के
समुंदरों
में
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Kiran K
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शाम
ढलने
से
फ़क़त
शाम
नहीं
ढलती
है
उम्र
ढल
जाती
है
जल्दी
पलट
आना
मेरे
दोस्त
Ashfaq Nasir
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परिन्दे
होते
तो
डाली
पर
लौट
भी
जाते
हमें
न
याद
दिलाओ
कि
शाम
हो
गई
है
Rajesh Reddy
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शबो
रोज़
की
चाकरी
ज़िन्दगी
की
मुयस्सर
हुईं
रोटियाँ
दो
घड़ी
की
नहीं
काम
आएँ
जो
इक
दिन
मशीनें
ज़रूरत
बने
आदमी
आदमी
की
कि
कल
शाम
फ़ुरसत
में
आई
उदासी
बता
दी
मुझे
क़ीमतें
हर
ख़ुशी
की
किया
क्या
अमन
जी
ने
बाइस
बरस
में
कभी
जी
लिया
तो
कभी
ख़ुद-कुशी
की
ग़मों
को
ठिकाने
लगाते
लगाते
घड़ी
आ
गई
आदमी
के
ग़मी
की
ये
सारी
तपस्या
का
कारण
यही
है
मिसालें
बनें
तो
बनें
सादगी
की
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Aman G Mishra
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तू
नया
है
तो
दिखा
सुब्ह
नई
शाम
नई
वर्ना
इन
आँखों
ने
देखे
हैं
नए
साल
कई
Faiz Ludhianvi
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तू
है
सूरज
तुझे
मालूम
कहाँ
रात
का
दुख
तू
किसी
रोज़
मेरे
घर
में
उतर
शाम
के
बाद
Farhat Abbas Shah
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दिल
आज
शाम
से
ही
उसे
ढूँडने
लगा
कल
जिस
के
बा'द
कमरे
में
तन्हाई
आई
थी
Ammar Iqbal
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दिल
ना-उमीद
तो
नहीं
नाकाम
ही
तो
है
लंबी
है
ग़म
की
शाम
मगर
शाम
ही
तो
है
Faiz Ahmad Faiz
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इश्क़
में
हाल
जो
हुआ
मेरा
आप
होते
तो
मर
गए
होते
Afzal Sultanpuri
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याद
करके
वो
क़िस्से
पुराने
सभी
यार
मर
ही
गए
थे
दीवाने
सभी
Afzal Sultanpuri
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अब
मुझे
मेरा
ठिकाना
पूछता
है
बाद
मरने
के
दीवाना
पूछता
है
किस
तरफ़
ले
जा
रहा
है
यार
तेरा
तुम
बताओ
अब
ज़माना
पूछता
है
आसमानों
से
कहा
था
ये
ज़मीं
ने
वो
मिरे
अंदर
खज़ाना
पूछता
है
मैं
कई
दिन
से
यहाँ
ठहरा
हुआ
हूँ
कब
करेगा
वो
रवाना
पूछता
है
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Afzal Sultanpuri
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उन
को
लगता
है
सब
तमाशा
है
वो
मोहब्बत
जो
बे-तहाशा
है
Afzal Sultanpuri
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पहले
से
बाद
हो
गया
हूँ
मैं
मर
के
आज़ाद
हो
गया
हूँ
मैं
इश्क़
था
यार
मैं
कभी
जिसका
उसकी
अब
याद
हो
गया
हूँ
मैं
ख़ैर
तुम
बात
को
नहीं
समझे
क़ैस
फ़रहाद
हो
गया
हूँ
मैं
बद्दुआ
काम
आ
गई
उसकी
देख
बर्बाद
हो
गया
हूँ
मैं
सैकड़ों
लोग
मारते
पत्थर
सबकी
फ़रियाद
हो
गया
हूँ
मैं
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Afzal Sultanpuri
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