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Afzal Sultanpuri
yaad karke vo qisse purane sabhi
yaad karke vo qisse purane sabhi | याद करके वो क़िस्से पुराने सभी
- Afzal Sultanpuri
याद
करके
वो
क़िस्से
पुराने
सभी
यार
मर
ही
गए
थे
दीवाने
सभी
- Afzal Sultanpuri
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अब
और
कोई
भी
नया
क़िस्सा
न
बना
तू
साहब
यूँँ
मुहब्बत
को
तमाशा
न
बना
तू
Rovej sheikh
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रफ़्ता
रफ़्ता
ख़त्म
क़िस्सा
हो
गया,
होना
ही
था
वो
भी
आख़िर
मेरे
जैसा
हो
गया,
होना
ही
था
Ashar Najmi
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कुछ
न
रह
सका
जहाँ
विरानियाँ
तो
रह
गईं
तुम
चले
गए
तो
क्या
कहानियाँ
तो
रह
गईं
Khalil Ur Rehman Qamar
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क्यूँ
हिज्र
के
सभी
को
क़िस्से
सुना
रहे
हो
ग़म
बेचते
हो
सबको
ग़म
की
दुकान
हो
तुम
Amaan Pathan
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हमीं
तक
रह
गया
क़िस्सा
हमारा
किसी
ने
ख़त
नहीं
खोला
हमारा
मु'आफ़ी
और
इतनी
सी
ख़ता
पर
सज़ा
से
काम
चल
जाता
हमारा
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Shariq Kaifi
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हसीं
ख़्वाबों
को
अपने
साथ
में
ढोती
हुई
आंँखे
बहुत
प्यारी
लगी
हमको
तेरी
सोती
हुई
आंँखे
मोहब्बत
में
ये
दो
क़िस्से
सुना
है
रोज़
होते
हैं
कभी
हँसता
हुआ
चेहरा
कभी
रोती
हुई
आंँखे
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Naimish trivedi
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तुम्हारे
बिन
गुज़ारी
रात
के
बस
दो
ही
क़िस्से
हैं
कभी
हिचकी
नहीं
रुकती
कभी
सिसकी
नहीं
रुकती
Ankita Singh
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मेरी
तस्वीरें
जला
दो
साहिबा
और
फिर
शम्मा
बुझा
दो
साहिबा
एक
क़िस्सा
एक
लड़का
और
तुम
अब
तो
मुझ
को
चुप
करा
दो
साहिबा
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Anand Raj Singh
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मैं
अगर
अपनी
जवानी
के
सुना
दूँ
क़िस्से
ये
जो
लौंडे
हैं
मेरे
पाँव
दबाने
लग
जाए
Mehshar Afridi
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जमाना
भूल
पायेगा
नहीं
अपनी
मुहब्बत
छपेंगे
क्लास
दसवीं
में
सभी
किस्से
हमारे
Shubham Seth
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इश्क़
में
इतनी
पाबंदी
है
क्यूँ
वो
इसी
सोच
में
रोया
करती
थी
आँख
से
आँसू
बहते
थे
उसके
वो
तकिए
को
भिगोया
करती
थी
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Afzal Sultanpuri
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मैं
अकेला
नहीं
हूँ
कमरे
में
साथ
रहती
है
मेरे
तन्हाई
Afzal Sultanpuri
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हुस्न
की
बात
नहीं
करता
हूँ
वक़्त
बर्बाद
नहीं
करता
हूँ
Afzal Sultanpuri
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अभी
ये
जंग
तो
हारा
नहीं
है
मगर
अब
दूसरा
चारा
नहीं
है
कहाँ
से
ला
रहे
हो
खारा
पानी
नदी
में
पानी
तो
खारा
नहीं
है
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Afzal Sultanpuri
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दीन
दुनिया
में
बेच
खाएँगे
बाद
उसके
कहाँ
को
जाएँगे
कैसी
सूरत
बना
के
रक्खी
है
शक्ल
किसको
भला
दिखाएँगे
आँख
से
ख़ून
ही
निकलता
है
तेरा
मातम
हमीं
मनाएँगे
जन्मदिन
ये
तुम्हें
मुबारक
हो
दास्ताँ
हम
तुम्हें
सुनाएँगे
आख़िरी
मरतबा
मिलो
जानाँ
शहर
तेरे
कभी
न
आएँगे
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Afzal Sultanpuri
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