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Adarsh Akshar
patthar bhi hai sheesha bhi
patthar bhi hai sheesha bhi | पत्थर भी है शीशा भी
- Adarsh Akshar
पत्थर
भी
है
शीशा
भी
अद्भुत
है
ये
दुनिया
भी
दाद
सदा
है
देता
वो
शे'र
कहूँ
मैं
जैसा
भी
तुमको
पाने
की
ख़ातिर
कितना
कुछ
है
खोया
भी
क़िस्मत
जिस
दिन
अच्छी
हो
चलता
खोटा
सिक्का
भी
ग़ज़लें
कहते
जीना
है
ग़ज़लें
कहते
मरना
भी
- Adarsh Akshar
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अपनी
क़िस्मत
में
सभी
कुछ
था
मगर
फूल
ना
थे
तुम
अगर
फूल
ना
होते
तो
हमारे
होते
Ashfaq Nasir
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अपनी
क़िस्मत
में
सभी
कुछ
था
मगर
फूल
न
थे
तुम
अगर
फूल
न
होते
तो
हमारे
होते
Ashfaq Nasir
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अलमास
धरे
रह
जाते
हैं
बिकता
है
तो
पत्थर
बिकता
है
अजनास
नहीं
इस
दुनिया
में
इंसाँ
का
मुक़द्दर
बिकता
है
'खालिद
सज्जाद'
सुनार
हूँ
मैं
इस
ग़म
को
ख़ूब
समझता
हूँ
जब
बेटा
छुप
कर
रोता
है
तब
माँ
का
ज़ेवर
बिकता
है
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Khalid Sajjad
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घर
से
निकले
हुए
बेटों
का
मुक़द्दर
मालूम
माँ
के
क़दमों
में
भी
जन्नत
नहीं
मिलने
वाली
Iftikhar Arif
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ख़ुदी
को
कर
बुलंद
इतना
कि
हर
तक़दीर
से
पहले
ख़ुदा
बंदे
से
ख़ुद
पूछे
बता
तेरी
रज़ा
क्या
है
Allama Iqbal
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कभी
पत्थर
मुक़द्दर
लिख
नहीं
सकता
मगर
समझो
जिसे
पत्थर
में
ढूँढो
हो
तुम्हारे
पास
ही
तो
है
Tanha
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मैं
उन्हीं
आबादियों
में
जी
रहा
होता
कहीं
तुम
अगर
हँसते
नहीं
उस
दिन
मेरी
तक़दीर
पर
Zia Mazkoor
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मेरी
क़िस्मत
कि
ये
दुनिया
मुझे
पहचानती
है
लोग
मर
जाते
हैं
पहचान
बनाने
के
लिए
Nadeem Farrukh
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जो
मिल
गया
उसी
को
मुक़द्दर
समझ
लिया
जो
खो
गया
मैं
उस
को
भुलाता
चला
गया
Sahir Ludhianvi
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सितारे
और
क़िस्मत
देख
कर
घर
से
निकलते
हैं
जो
बुज़दिल
हैं
मुहूरत
देखकर
घर
से
निकलते
हैं
हमें
लेकिन
सफ़र
की
मुश्किलों
से
डर
नहीं
लगता
कि
हम
बच्चों
की
सूरत
देखकर
घर
से
निकलते
हैं
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Abrar Kashif
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चेहरे
पे
है
ख़ुशी
नहीं
ये
बात
अब
नई
नहीं
हूँ
जानता
उसे
भले
पर
उस
सेेे
दोस्ती
नहीं
तू
जितना
सोचता
है
यार
वो
उतनी
भी
बुरी
नहीं
है
कौन
ऐसा
दुनिया
में
जो
दुनिया
से
दुखी
नहीं
कोशिश
बहुत
की
दिल
से
पर
घर
वालों
से
बनी
नहीं
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Adarsh Akshar
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ग़ज़लें
सुनानी
हैं
मुझे
दो
चार
आपको
मैं
ने
सुना
है
आप
भी
साहिर
को
पढ़ते
हैं
Adarsh Akshar
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हद
से
ज़्यादा
अच्छा
है
यानी
दिल
से
बच्चा
है
नौबत
ऐसी
आई
अब
सबको
सब
सेे
ख़तरा
है
राम
नहीं
हैं
कलयुग
में
बस
रावण
का
पुतला
है
सबको
देता
है
मौक़ा
जो
क़िस्मत
को
रचता
है
दुख
में
दुनिया
रोती
है
दुख
में
'अक्षर'
हँसता
है
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Adarsh Akshar
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याद
आती
है
तुम्हारी
आज
भी
तुम
मुझे
उतनी
ही
प्यारी
आज
भी
Adarsh Akshar
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कर
चुके
हैं
फ़ैसला
हम
छोड़
देंगे
सब
नशा
हम
चाहते
थे
कहना
लेकिन
कह
न
पाए
शुक्रिया
हम
चाहे
जितना
तुम
छिपाओ
ढूँढ़
लेंगे
रास्ता
हम
इक
झलक
पा
कर
तुम्हारी
हो
गए
हैं
ख़ुशनुमा
हम
सिर्फ़
दिल
रखने
की
ख़ातिर
कर
रहे
थे
वाह-वा
हम
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Adarsh Akshar
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