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Adarsh Akshar
kar chuke hain faisla ham
kar chuke hain faisla ham | कर चुके हैं फ़ैसला हम
- Adarsh Akshar
कर
चुके
हैं
फ़ैसला
हम
छोड़
देंगे
सब
नशा
हम
चाहते
थे
कहना
लेकिन
कह
न
पाए
शुक्रिया
हम
चाहे
जितना
तुम
छिपाओ
ढूँढ़
लेंगे
रास्ता
हम
इक
झलक
पा
कर
तुम्हारी
हो
गए
हैं
ख़ुशनुमा
हम
सिर्फ़
दिल
रखने
की
ख़ातिर
कर
रहे
थे
वाह-वा
हम
- Adarsh Akshar
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सब
को
मारा
'जिगर'
के
शे'रों
ने
और
'जिगर'
को
शराब
ने
मारा
Jigar Moradabadi
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तुम्हारा
प्यार
तो
साँसों
में
साँस
लेता
है
जो
होता
नश्शा
तो
इक
दिन
उतर
नहीं
जाता
Waseem Barelvi
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भाई
बहनों
की
मोहब्बत
का
नशा
मत
पूछिए
बे-तकल्लुफ़
हो
गए
तो
गुदगुदी
तक
आ
गए
Iftikhar Falak Kazmi
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तुम्हारी
आँखों
की
तौहीन
है
ज़रा
सोचो
तुम्हारा
चाहने
वाला
शराब
पीता
है
Munawwar Rana
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शराबों
से
ख़ुमारी
आ
रही
है
नशा
तेरा
उतरता
जा
रहा
है
anupam shah
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हक़ीक़तों
की
तल्ख़ियाँ
भी
मीठे
ख़्वाब
की
तरह
मुझे
शराब
दे
रही
है
वो
गुलाब
की
तरह
Rachit Sonkar
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मुझे
शराब
पिलाई
गई
है
आँखों
से
मेरा
नशा
तो
हज़ारों
बरस
में
उतरेगा
Vijendra Singh Parwaaz
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मेरी
जवानी
को
कमज़ोर
क्यूँ
समझते
हो
तुम्हारे
वास्ते
अब
भी
शबाब
बाक़ी
है
ये
और
बात
है
बोतल
ये
गिर
के
टूट
गई
मगर
अभी
भी
ज़रा
सी
शराब
बाक़ी
है
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Paplu Lucknawi
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आए
थे
हँसते
खेलते
मय-ख़ाने
में
'फ़िराक़'
जब
पी
चुके
शराब
तो
संजीदा
हो
गए
Firaq Gorakhpuri
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वो
गुल-फ़रोश
कहाँ
अब
गुलाब
किस
से
लूँ
नहीं
रहा
मिरा
साक़ी
शराब
किस
से
लूँ
Anwar Shaoor
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दो
पल
के
हैं
मेहमान
सब
बन
जाते
पर
भगवान
सब
बस
एक
सच
को
सुनके
ही
हो
जाते
हैं
हैरान
सब
ऐ
दोस्त!
तेरे
शहर
में
क्यूँ
इतने
हैं
नादान
सब
जीवन
में
कुछ
ऐसा
करो
गाते
रहें
गुन-गान
सब
ख़ुद
के
लिए
रखता
कहाँ
कर
देता
'अक्षर'
दान
सब
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Adarsh Akshar
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इतना
करो
उपकार
तुम
छुट्टी
ले
लो
इतवार
तुम
चाहे
जो
भी
हो
जाए
पर
करना
हमीं
से
प्यार
तुम
तुम
से
ही
बस
बनती
मिरी
इकलौते
मेरे
यार
तुम
ख़ुद
को
बड़ा
कहने
लगे
कह
कर
ग़ज़ल
दो
चार
तुम
मुझको
नहीं
पहचाना
क्या
पढ़ते
नहीं
अख़बार
तुम
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Adarsh Akshar
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ना-मुमकिन
को
मुमकिन
करना
अपने
दिल
की
हर
दिन
करना
Adarsh Akshar
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चोट
लगती
दिल
पे
जब
भी
टूट
जाता
आदमी
त्याग
के
सुख
चैन
दो
पैसे
कमाता
आदमी
Adarsh Akshar
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बहुत
कुछ
करना
था
इस
ज़िंदगी
में
मगर
बस
रह
गए
हम
आशिक़ी
में
Adarsh Akshar
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