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Adarsh Akshar
do pal ke hain mehmaan sab
do pal ke hain mehmaan sab | दो पल के हैं मेहमान सब
- Adarsh Akshar
दो
पल
के
हैं
मेहमान
सब
बन
जाते
पर
भगवान
सब
बस
एक
सच
को
सुनके
ही
हो
जाते
हैं
हैरान
सब
ऐ
दोस्त!
तेरे
शहर
में
क्यूँ
इतने
हैं
नादान
सब
जीवन
में
कुछ
ऐसा
करो
गाते
रहें
गुन-गान
सब
ख़ुद
के
लिए
रखता
कहाँ
कर
देता
'अक्षर'
दान
सब
- Adarsh Akshar
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लाज़िम
है
अब
कि
आप
ज़ियादा
उदास
हों
इस
शहर
में
बचे
हैं
बहुत
कम
उदास
लोग
Bhaskar Shukla
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तेरी
गली
को
छोड़
के
पागल
नहीं
गया
रस्सी
तो
जल
गई
है
मगर
बल
नहीं
गया
मजनूँ
की
तरह
छोड़ा
नहीं
मैं
ने
शहर
को
या'नी
मैं
हिज्र
काटने
जंगल
नहीं
गया
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Ismail Raaz
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तुम्हें
मैं
क्या
बताऊँ
इस
शहर
का
हाल
कैसा
है
यहाँ
बारिश
तो
होती
है
मगर
सावन
नहीं
आता
Bhaskar Shukla
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'अंजुम'
तुम्हारा
शहर
जिधर
है
उसी
तरफ़
इक
रेल
जा
रही
थी
कि
तुम
याद
आ
गए
Anjum Rehbar
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ये
शहर
वो
है
कि
कोई
ख़ुशी
तो
क्या
देता
किसी
ने
दिल
भी
दुखाया
नहीं
बहुत
दिन
से
Farhat Ehsaas
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पत्थर
के
ख़ुदा
पत्थर
के
सनम
पत्थर
के
ही
इंसाँ
पाए
हैं
तुम
शहर-ए-मोहब्बत
कहते
हो
हम
जान
बचा
कर
आए
हैं
Sudarshan Fakir
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देखें
क़रीब
से
भी
तो
अच्छा
दिखाई
दे
इक
आदमी
तो
शहर
में
ऐसा
दिखाई
दे
Zafar Gorakhpuri
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मेरे
ही
संग-ओ-ख़िश्त
से
तामीर-ए-बाम-ओ-दर
मेरे
ही
घर
को
शहर
में
शामिल
कहा
न
जाए
Majrooh Sultanpuri
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बंदा
किसी
के
साथ,
ख़ुदा
हो
किसी
के
साथ
जाने
पराए
शहर
में
क्या
हो
किसी
के
साथ
Mueed Mirza
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मुझ
को
कहानियाँ
न
सुना
शहर
को
बचा
बातों
से
मेरा
दिल
न
लुभा
शहर
को
बचा
Taimur Hasan
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दरिया
होना
सहरा
होना
जो
भी
होना
अच्छा
होना
दुनिया
का
हो
सकता
था
पर
मुझको
था
बस
तेरा
होना
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Adarsh Akshar
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इन
आँखों
ने
हर
मंज़र
याद
रखा
है
छूके
अंबर
अपना
घर
याद
रखा
है
शायद
उसका
चेहरा
मैं
भूल
चुका
हूँ
उसका
नंबर
अब
भी
पर
याद
रखा
है
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Adarsh Akshar
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करती
सबकी
ख़िदमत
माँ
बच्चों
की
है
हिम्मत
माँ
बाहरस
तीख़ी
है
पर
अंदर
से
है
शरबत
माँ
घर
की
ख़ुशियों
की
ख़ातिर
करती
रोज़
इबादत
माँ
बिल्कुल
भी
चालाक
नहीं
सीधी
सादी
औरत
माँ
सब
सो
जाते
हैं
लेकिन
करते
रहती
मेहनत
माँ
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Adarsh Akshar
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लग
जाए
तुम्हें
सारी
की
सारी
दु'आ
मेरी
तेरी
ख़ुशी
में
मेरी
ख़ुशी
है
छिपी
हरदम
Adarsh Akshar
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दोनों
में
बस
इतना
अंतर
है
एक
मदारी
तो
इक
बंदर
है
Adarsh Akshar
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