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Ajeetendra Aazi Tamaam
na jaane kis gali men rooth jaa.e zindagi hamsena jaane kis gali men zindagi ki shaam ho jaa.e
na jaane kis gali men rooth jaa.e zindagi hamsena jaane kis gali men zindagi ki shaam ho jaa.e | न जाने किस गली में रूठ जाए ज़िंदगी हम सेे
- Ajeetendra Aazi Tamaam
न
जाने
किस
गली
में
रूठ
जाए
ज़िंदगी
हम
सेे
न
जाने
किस
गली
में
ज़िंदगी
की
शाम
हो
जाए
- Ajeetendra Aazi Tamaam
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बाक़ी
सारे
काम
भुलाकर
इश्क़
किया
सुब्ह
से
लेकर
शाम
बराबर
इश्क़
किया
ग़लती
ये
थोड़े
थी
इश्क़
किया
हम
ने
ग़लती
ये
थी
ग़ैर
बिरादर
इश्क़
किया
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Vashu Pandey
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परिन्दे
होते
तो
डाली
पर
लौट
भी
जाते
हमें
न
याद
दिलाओ
कि
शाम
हो
गई
है
Rajesh Reddy
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शबो
रोज़
की
चाकरी
ज़िन्दगी
की
मुयस्सर
हुईं
रोटियाँ
दो
घड़ी
की
नहीं
काम
आएँ
जो
इक
दिन
मशीनें
ज़रूरत
बने
आदमी
आदमी
की
कि
कल
शाम
फ़ुरसत
में
आई
उदासी
बता
दी
मुझे
क़ीमतें
हर
ख़ुशी
की
किया
क्या
अमन
जी
ने
बाइस
बरस
में
कभी
जी
लिया
तो
कभी
ख़ुद-कुशी
की
ग़मों
को
ठिकाने
लगाते
लगाते
घड़ी
आ
गई
आदमी
के
ग़मी
की
ये
सारी
तपस्या
का
कारण
यही
है
मिसालें
बनें
तो
बनें
सादगी
की
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Aman G Mishra
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अब
तो
चुप-चाप
शाम
आती
है
पहले
चिड़ियों
के
शोर
होते
थे
Mohammad Alvi
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सुब्ह-ए-मग़रूर
को
वो
शाम
भी
कर
देता
है
शोहरतें
छीन
के
गुमनाम
भी
कर
देता
है
वक़्त
से
आँख
मिलाने
की
हिमाकत
न
करो
वक़्त
इंसान
को
नीलाम
भी
कर
देता
है
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Nadeem Farrukh
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मसाइल
तो
बहुत
से
हैं
मगर
बस
एक
ही
हल
है
सहरस
शाम
तक
सर
मेरा
है
बेगम
की
चप्पल
है
मेरे
मालिक
भला
इस
सेे
बुरी
भी
क्या
सज़ा
होगी
मेरा
शादीशुदा
होना
ही
दोज़ख़
की
रिहर्सल
है
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Paplu Lucknawi
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जाने
क्या
क्या
ज़ुल्म
परिंदे
देख
के
आते
हैं
शाम
ढले
पेड़ों
पर
मर्सिया-ख़्वानी
होती
है
Afzal Khan
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अभी
तो
शाम
की
दस्तक
हुई
है
अभी
से
लग
गया
बिस्तर
हमारा
यही
तन्हाई
है
जन्नत
हमारी
इसी
जन्नत
में
है
अब
घर
हमारा
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Vikas Sharma Raaz
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'मीर'
से
बैअत
की
है
तो
'इंशा'
मीर
की
बैअत
भी
है
ज़रूर
शाम
को
रो
रो
सुब्ह
करो
अब
सुब्ह
को
रो
रो
शाम
करो
Ibn E Insha
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जब
सर-ए-शाम
पजीराई-ए-फ़न
होती
है
शाहज़ादी
को
कनीज़ों
से
जलन
होती
है
ले
तो
आया
हूँ
तुझे
घेर
के
अपनी
जानिब
आगे
इंसान
की
अपनी
भी
लगन
होती
है
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Azhar Faragh
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हमारा
दिल
कोई
तोड़े
तो
तोड़े
कैसे
की
'आज़ी'
ग़ज़ब
ही
लोग
हैं
हम
ख़ुद
से
ही
दिल
तोड़
लेते
हैं
Ajeetendra Aazi Tamaam
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किसी
की
आँख
में
बन
कर
रहा
ख़ुशी
यारों
किसी
की
आँख
में
बन
अश्क़-ए-ग़म
रहा
पानी
Ajeetendra Aazi Tamaam
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तू
आसमाँ
का
हसीं
चाँद
और
मैं
दीवाना
मुझे
तो
सिर्फ़
तेरा
इंतज़ार
करना
है
Ajeetendra Aazi Tamaam
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मिलीं
चंद
नाकामियाँ
जो
सफ़र
में
सितम
ढा
रही
हैं
मेरी
ज़िंदगी
पर
Ajeetendra Aazi Tamaam
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बाज़
बनना
है
तो
फिर
कद
भूल
जा
आँख
में
रख
लक्ष्य
और
हद
भूल
जा
किसलिए
डरता
है
दीवारों
से
तू
आ
समाँँ
को
देख
सरहद
भूल
जा
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Ajeetendra Aazi Tamaam
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