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Ajeetendra Aazi Tamaam
meri jaañ gir gir ke uthna seekh lo
meri jaañ gir gir ke uthna seekh lo | मेरी जाँ गिर गिर के उठना सीख लो
- Ajeetendra Aazi Tamaam
मेरी
जाँ
गिर
गिर
के
उठना
सीख
लो
वरना
तुमको
तोड़
देंगी
आँधियाँ
- Ajeetendra Aazi Tamaam
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दवाओं
की
रसीदें
देख
ली
थीं
किताबें
इसलिए
माँगी
नहीं
हैं
Tanoj Dadhich
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चाय
की
प्याली
में
नीली
टेबलेट
घोली
सह
में
सह
में
हाथों
ने
इक
किताब
फिर
खोली
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Bashir Badr
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सिर्फ़
तालीम
है
वो
शय
यारों
जिस
सेे
ज़िंदा
चराग़
जलते
हैं
Ajeetendra Aazi Tamaam
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किताब
फ़िल्म
सफ़र
इश्क़
शा'इरी
औरत
कहाँ
कहाँ
न
गया
ख़ुद
को
ढूँढता
हुआ
मैं
Jawwad Sheikh
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गिफ़्ट
कर
देता
हूँ
उसको
मैं
किताबें,
लेकिन
उनको
पढ़
लेने
की
मोहलत
नहीं
देता
उसको
Harman Dinesh
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भूलभुलैया
था
उन
ज़ुल्फ़ों
में
लेकिन
हमको
उस
में
अपनी
राहें
दिखती
थीं
आपकी
आँखों
को
देखा
तो
इल्म
हुआ
क्यूँँ
अर्जुन
को
केवल
आँखें
दिखती
थीं
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Ashraf Jahangeer
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हुनर
से
काम
लिया
पेंट
ब्रश
नहीं
तोड़ा
बना
लिया
तेरे
जैसा
ही
कोई
रंगों
से
मुझे
ये
डर
है
कि
मिल
जाएगी
तो
रो
दूँगा
मैं
जिस
ख़ुशी
को
तरसता
रहा
हूँ
बरसों
से
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Rahul Gurjar
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हम
भी
दरिया
हैं
हमें
अपना
हुनर
मालूम
है
जिस
तरफ़
भी
चल
पड़ेंगे
रास्ता
हो
जाएगा
Bashir Badr
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कल
मेरी
एक
प्यारी
सहेली
किताब
में
इक
ख़त
छुपा
रही
थी
कि
तुम
याद
आ
गए
Anjum Rehbar
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हद
से
बढ़े
जो
इल्म
तो
है
जहल
दोस्तो
सब
कुछ
जो
जानते
हैं
वो
कुछ
जानते
नहीं
Khumar Barabankvi
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जाने
कैसी
कश्मकश
है
क्या
करूँँ
जी
में
आता
है
कि
दुनिया
फूँक
दूँ
Ajeetendra Aazi Tamaam
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बचपन
से
ख़ुद
पे
दाँव
लगाते
रहे
हैं
हम
सीखी
है
खेल
खेल
में
हमने
शनावरी
Ajeetendra Aazi Tamaam
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बे
सबब
हाव-हू
सी
रहती
है
दाँव
पर
आबरू
सी
रहती
है
इश्क़
जब
भी
किसी
से
होता
है
इक
अजब
जुस्तजू
सी
रहती
है
लम्हा
दर
लम्हा
दिल
मचलता
है
हर
पहर
आरज़ू
सी
रहती
है
यूँँ
लगे
की
हर
एक
चेहरे
पर
सूरत
इक
हू-ब-हू
सी
रहती
है
मन
भटकता
है
वन
हिरन
बनकर
ख़ुशबू
इक
रू-ब-रू
सी
रहती
है
ख़ुद
से
ही
अब
वो
बात
करता
है
दिल
में
इक
गुफ़्तगू
सी
रहती
है
जलके
सब
ख़ाक
हो
गए
'आज़ी'
फिर
भी
इक
राख
बू
सी
रहती
है
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Ajeetendra Aazi Tamaam
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नहीं
उस्ताद
कोई
उनके
जैसा
जो
समझाए
सुख़न
के
हर
भँवर
को
ग़ज़ल
है
मुंतज़िर
इस्लाह
को
इक
मिलो
गर
तुम
तो
ये
कहना
"समर"
को
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Ajeetendra Aazi Tamaam
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हसरतें
ख़्वाब
और
परेशानी
ये
सभी
ज़िंदगी
के
पहलू
हैं
Ajeetendra Aazi Tamaam
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