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Aatish Indori
kes likhwaa paa.e to aisi vakaalat ho gaii
kes likhwaa paa.e to aisi vakaalat ho gaii | केस लिखवा पाए तो ऐसी वकालत हो गई
- Aatish Indori
केस
लिखवा
पाए
तो
ऐसी
वकालत
हो
गई
चंद
घंटों
में
महोदय
की
ज़मानत
हो
गई
- Aatish Indori
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उसने
खिड़की
से
चाँद
देखा
था
मैंने
खिड़की
में
चाँद
देखा
है
Zubair Ali Tabish
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सौ
चाँद
भी
चमकेंगे
तो
क्या
बात
बनेगी
तुम
आए
तो
इस
रात
की
औक़ात
बनेगी
Dagh Dehlvi
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जो
कल
शब
से
तन्हा
था
कैसा
होगा
वो
निस्फ़
चाँद
अब
जाने
किस
का
होगा
ALI ZUHRI
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वो
अगर
हँस
दे
तो
मैं
लिख
दूँ
क़सीदे
चाँद
तक
इश्क़
करने
का
सलीक़ा
वो
सिखाती
है
बहुत
Amaan Pathan
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छत
पे
सिगरेट
ले
के
बैठा
है
चाँद
भी
बेक़रार
है
शायद
Satya Prakash Soni
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चाँद
का
फिर
मेरा
रस्ता
देखती
आँखें
तुम्हारी
आज
करवाचौथ
के
दिन
काश
हम
तुम
साथ
होते
Gaurav Singh
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यही
है
ज़िंदगी
कुछ
ख़्वाब
चंद
उम्मीदें
इन्हीं
खिलौनों
से
तुम
भी
बहल
सको
तो
चलो
Nida Fazli
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चाँद
भी
हैरान
दरिया
भी
परेशानी
में
है
अक्स
किस
का
है
कि
इतनी
रौशनी
पानी
में
है
Farhat Ehsaas
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चंद
ख़्वाबों
की
हाथा-पाई
में
नींद
कल
गिर
गई
थी
बिस्तर
से
Shiva awasthi
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मैं
पर्वतों
से
लड़ता
रहा
और
चंद
लोग
गीली
ज़मीन
खोद
के
फ़रहाद
हो
गए
Rahat Indori
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नंबर
बदला
घर
बदला
दफ़्तर
बदला
उसने
ख़ुद
को
गिरगिट
से
बढ़-कर
बदला
पहले
तो
उसने
मुझको
जी-भर
बदला
फिर
उसने
मन
बदला
और
दिलबर
बदला
उसने
दीवारें
बदली
छप्पर
बदला
मैं
तो
ध्यान
में
उतरा
और
अंबर
बदला
मंज़िल
मैंने
समझी
उसने
मक़ाम
बस
अगले
सफ़र
पे
निकला
तो
रहबर
बदला
अवसाद
से
तू
ही
बाहर
ला
सकता
है
तेरी
इक
समझाइश
ने
मंज़र
बदला
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Aatish Indori
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फ़ोन
पर
तब
तो
बात
होती
थी
तेरे
चुम्बन
से
रात
होती
थी
तुम
तो
माहिर
थे
खेल
में
जानाँ
मेरी
हर
बार
मात
होती
थी
दिल
को
ख़त
में
उकेर
पाते
थे
तब
क़लम
और
दवात
होती
थी
याद
है
जब
क़रीब
थे
हम
तुम
रात
के
बाद
रात
होती
थी
आतिश
इंदौरी
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Aatish Indori
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गाँव
की
पहचान
थी
जो
वो
कँगूरा
काट
डाला
पथ
में
रोड़ा
डाल
थी
पर
पेड़
पूरा
काट
डाला
Aatish Indori
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फंदा-वंदा
छोड़कर
मैं
दूजा
सपना
बुन
रहा
हूँ
ख़ुद-कुशी
तुझको
नहीं
मैं
ज़िंदगी
को
चुन
रहा
हूँ
जान-ए-जानाँ
जा
रहा
हूँ
मैं
मोहब्बत
के
शिखर
पर
आशिक़ी
को
छोड़कर
मैं
बंदगी
को
चुन
रहा
हूँ
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Aatish Indori
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ख़ाक
दिन
अच्छे
बाद
में
निकले
हिज्र
के
दिन
विषाद
में
निकले
हम
वे
हैं
जिनको
इश्क़
पहले
हुआ
मूँछ
के
बाल
बाद
में
निकले
कुछ
दिनों
तक
तो
ठीक
था
सब
कुछ
हिज्र
के
दर्द
बाद
में
निकले
ढूँढा
तो
अच्छा
लड़का
ही
था
पर
ऐब
सारे
दमाद
में
निकले
कोई
बेटा
न
था
तो
यूँँ
हुआ
है
बेटे
के
गुण
दामाद
में
निकले
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Aatish Indori
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