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Abhay Aadiv
bas madad ka dikhaava hota hai
bas madad ka dikhaava hota hai | बस मदद का दिखावा होता है
- Abhay Aadiv
बस
मदद
का
दिखावा
होता
है
मतलबी
ये
ज़माना
होता
है
सिर्फ़
कहने
से
कुछ
नहीं
होता
जो
कहा
उसको
करना
होता
है
कर्म
ही
धर्म
है
बड़ा
सब
सेे
कर्म
बिन
सब
अधूरा
होता
है
जीत
की
एहमियत
वही
जाने
जो
कई
बार
हारा
होता
है
फ़िक्र
अंजाम
की
नहीं
मुझ
को
रहता
होकर
जो
होना
होता
है
- Abhay Aadiv
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'मीर'
के
दीन-ओ-मज़हब
को
अब
पूछते
क्या
हो
उन
ने
तो
क़श्क़ा
खींचा
दैर
में
बैठा
कब
का
तर्क
इस्लाम
किया
Meer Taqi Meer
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न
तीर्थ
जा
कर
न
धर्म
ग्रंथो
का
सार
पा
कर
सुकूँ
मिला
है
मुझे
तो
बस
तेरा
प्यार
पा
कर
ग़रीब
बच्चे
किताब
पढ़
कर
सँवर
रहे
हैं
अमीर
लड़के
बिगड़
रहे
हैं
दुलार
पा
कर
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Alankrat Srivastava
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अल्लाह
बना
दे
मिरे
अश्कों
को
कबूतर
सब
पूछ
रहे
हैं
तिरे
रूमाल
में
क्या
है
Khan Janbaz
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अल्लाह
अल्लाह
हुस्न
की
ये
पर्दा-दारी
देखिए
भेद
जिस
ने
खोलना
चाहा
वो
दीवाना
हुआ
Arzoo Lakhnavi
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उम्र
भर
कौन
निभाता
है
त'अल्लुक़
इतना
ऐ
मेरी
जान
के
दुश्मन
तुझे
अल्लाह
रक्खे
Ahmad Faraz
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हम
ऐसे
सुनते
हैं
उसकी
बातों
को
जैसे
कोई
सूफ़ी
गाने
सुनता
है
Tanoj Dadhich
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अल्लाह
तेरे
हाथ
है
अब
आबरू-ए-शौक़
दम
घुट
रहा
है
वक़्त
की
रफ़्तार
देख
कर
Bismil Azimabadi
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मज़हब
से
मेरे
क्या
तुझे
मेरा
दयार
और
मैं
और
यार
और
मिरा
कारोबार
और
Meer Taqi Meer
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रंग
और
नस्ल
ज़ात
और
मज़हब
जो
भी
है
आदमी
से
कमतर
है
इस
हक़ीक़त
को
तुम
भी
मेरी
तरह
मान
जाओ
तो
कोई
बात
बने
Sahir Ludhianvi
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कभी
अल्लाह
मियाँ
पूछेंगे
तब
उनको
बताएँगे
किसी
को
क्यूँ
बताएँ
हम
इबादत
क्यूँ
नहीं
करते
Farhat Ehsaas
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साल
भी
ख़त्म
होने
को
है
हिज्र
ही
ख़त्म
होता
नहीं
Abhay Aadiv
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कुछ
नहीं
कहता
अब
किसी
से
जो
कितना
कुछ
कहना
चाहता
होगा
Abhay Aadiv
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बेज़ार
कर
गई
यूँँ
इक
शख़्स
की
मुहब्बत
उसने
जो
छोड़ा
करनी
ही
छोड़
दी
मुहब्बत
लोगों
को
दर्द
मेरा
अब
अच्छा
लग
रहा
है
करना
सिखा
रही
है
ये
शा'इरी
मुहब्बत
तुमने
अभी
कहाँ
है
समझा
बिछड़ने
का
दुख
समझोगे
तुम
भला
क्या
ही
ये
मिरी
मुहब्बत
था
पहला
इश्क़
'आदिव'
ही
उसकी
ज़िंदगी
का
वो
मेरी
ज़िंदगी
की
है
आख़िरी
मुहब्बत
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Abhay Aadiv
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ले
रहा
हूँ
नैप
मैं
बस
आजकल
मुझ
को
तो
सोने
की
भी
फु़र्सत
नहीं
Abhay Aadiv
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उसका
होना
अलग
बात
है
मिलना
उस
सा
अलग
बात
है
मुस्कुराना
अलग
बात
है
शाद
रहना
अलग
बात
है
इश्क़
करना
तो
है
और
बात
ये
निभाना
अलग
बात
है
बाक़ी
एहसास
अपनी
जगह
उसका
छूना
अलग
बात
है
भूलना
चाहता
हूँ
तुम्हें
पर
भुलाना
अलग
बात
है
बातों
बातों
में
ही
बीती
रात
बात
करना
अलग
बात
है
तुम
'अभय'
उसको
क्यूँँ
हो
पसंद
तुम
में
कुछ
क्या
अलग
बात
है?
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Abhay Aadiv
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