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Abhay Aadiv
saal bhi khatm hone ko hai
saal bhi khatm hone ko hai | साल भी ख़त्म होने को है
- Abhay Aadiv
साल
भी
ख़त्म
होने
को
है
हिज्र
ही
ख़त्म
होता
नहीं
- Abhay Aadiv
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सब
ख़्वाहिशें
पूरी
हों
'फ़राज़'
ऐसा
नहीं
है
जैसे
कई
अश'आर
मुकम्मल
नहीं
होते
Ahmad Faraz
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उस
के
होंटों
पे
रख
के
होंट
अपने
बात
ही
हम
तमाम
कर
रहे
हैं
Jaun Elia
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भरे
हुए
जाम
पर
सुराही
का
सर
झुका
तो
बुरा
लगेगा
जिसे
तेरी
आरज़ू
नहीं
तू
उसे
मिला
तो
बुरा
लगेगा
ये
आख़िरी
कंपकंपाता
जुमला
कि
इस
तअ'ल्लुक़
को
ख़त्म
कर
दो
बड़े
जतन
से
कहा
है
उस
ने
नहीं
किया
तो
बुरा
लगेगा
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Zubair Ali Tabish
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हर
एक
चौखट
खुली
हुई
थी
हर
इक
दरीचा
खुला
हुआ
था
कि
उसकी
आमद
पे
दर
यहाँ
तक
कि
बेघरों
का
खुला
हुआ
था
ये
तेरी
हम्म
ने
हमें
ही
उलझन
में
डाल
रक्खा
है
वरना
हम
पर
तमाम
साइंस
के
फ़लसफ़ों
का
हर
एक
चिट्ठा
खुला
हुआ
था
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Saad Ahmad
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शरीफ़
इंसान
आख़िर
क्यूँ
इलेक्शन
हार
जाता
है
किताबों
में
तो
ये
लिक्खा
था
रावन
हार
जाता
है
Munawwar Rana
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सूरज
लिहाफ़
ओढ़
के
सोया
तमाम
रात
सर्दी
से
इक
परिंदा
दरीचे
में
मर
गया
Athar nasik
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चलो
माना
कि
रोना
मसअले
का
हल
नहीं
लेकिन
करे
भी
क्या
कोई
जब
ख़त्म
हर
उम्मीद
हो
जाए
Bhaskar Shukla
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न
जाने
ख़त्म
हुई
कब
हमारी
आज़ादी
तअल्लुक़ात
की
पाबंदियाँ
निभाते
हुए
Azhar Iqbal
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ये
इश्क़-विश्क़
का
क़िस्सा
तमाम
हो
जाए
सफ़ेद
दाढ़ी
हवस
की
गुलाम
हो
जाए
जवान
लड़कियों
बूढ़ों
से
तुम
रहो
हुश्यार
न
जाने
कौन
कहाँ
आसाराम
हो
जाए
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Paplu Lucknawi
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या'नी
कि
इश्क़
अपना
मुकम्मल
नहीं
हुआ
गर
मैं
तुम्हारे
हिज्र
में
पागल
नहीं
हुआ
वो
शख़्स
सालों
बाद
भी
कितना
हसीन
है
वो
रंग
कैनवस
पे
कभी
डल
नहीं
हुआ
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Kushal Dauneria
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ये
एक
दिन
फ़रेब
हुआ
मुझको
जाने
क्यूँँ
शायद
हो
इक
फ़रेब
ही
संसार
सारा
ये
Abhay Aadiv
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नज़ारे
खो
गए
थे
बाक़ी
सब
जब
तुम
मिले
मुझ
को
सितारे,
चाँद,
जुगनू,
शाम
तुझ
में
गुम
मिले
मुझ
को
Abhay Aadiv
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उसका
होना
अलग
बात
है
मिलना
उस
सा
अलग
बात
है
मुस्कुराना
अलग
बात
है
शाद
रहना
अलग
बात
है
इश्क़
करना
तो
है
और
बात
ये
निभाना
अलग
बात
है
बाक़ी
एहसास
अपनी
जगह
उसका
छूना
अलग
बात
है
भूलना
चाहता
हूँ
तुम्हें
पर
भुलाना
अलग
बात
है
बातों
बातों
में
ही
बीती
रात
बात
करना
अलग
बात
है
तुम
'अभय'
उसको
क्यूँँ
हो
पसंद
तुम
में
कुछ
क्या
अलग
बात
है?
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Abhay Aadiv
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बिना
इस
इश्क़
के
कैसे
गुज़ारा
हो
ज़रूरी
है
कि
हो
ये
इश्क़
दोबारा
Abhay Aadiv
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कुछ
नहीं
कहता
अब
किसी
से
जो
कितना
कुछ
कहना
चाहता
होगा
Abhay Aadiv
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