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Shubham Rai 'shubh'
muhabbat men kaii aise bhi saude kar gaya hooñ main
muhabbat men kaii aise bhi saude kar gaya hooñ main | मुहब्बत में कई ऐसे भी सौदे कर गया हूँ मैं
- Shubham Rai 'shubh'
मुहब्बत
में
कई
ऐसे
भी
सौदे
कर
गया
हूँ
मैं
हक़ीक़त
जान
के
जिसकी
बहुत
ही
डर
गया
हूँ
मैं
मिला
जो
भी
भरोसा
कर
लिया
उस
पे
ऐ
जान-ए-जाँ
नहीं
करना
था
जो
मुझको
वही
तो
कर
गया
हूँ
मैं
- Shubham Rai 'shubh'
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यक़ीं
मोहकम
अमल
पैहम
मोहब्बत
फ़ातेह-ए-आलम
जिहाद-ए-ज़िंदगानी
में
हैं
ये
मर्दों
की
शमशीरें
Allama Iqbal
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उसी
का
शहर
वही
मुद्दई
वही
मुंसिफ़
हमें
यक़ीं
था
हमारा
क़ुसूर
निकलेगा
Ameer Qazalbash
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यक़ीं
कैसे
करूँँ
वादों
पे
तेरे
साथ
रहने
के
यही
वादे
किए
होंगे
उन्होंने
भी
जो
बिछड़े
हैं
Priya Dixit
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जब
अपना
दिल
ख़ुद
ले
डूबे
औरों
पे
सहारा
कौन
करे
कश्ती
पे
भरोसा
जब
न
रहा
तिनकों
पे
भरोसा
कौन
करे
Anand Narayan Mulla
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ये
यक़ीं
है
की
मेरी
उल्फ़त
का
होगा
उन
पर
असर
कभी
न
कभी
Anwar Taban
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सो
देख
कर
तेरे
रुख़्सार-ओ-लब
यक़ीं
आया
कि
फूल
खिलते
हैं
गुलज़ार
के
अलावा
भी
Ahmad Faraz
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ब-जुज़
ख़ुदा
के
किसी
का
हम
पे
करम
नहीं
है
ये
कम
नहीं
है
किसी
का
सजदा
जबीं
पे
अपनी
रक़म
नहीं
है
ये
कम
नहीं
है
हमारी
चुप्पी
ये
है
ग़नीमत
वगरना
ये
जो
किया
है
तुम
ने
यक़ीन
मानो
हमारा
माथा
गरम
नहीं
है
ये
कम
नहीं
है
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Vashu Pandey
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झूट
पर
उसके
भरोसा
कर
लिया
धूप
इतनी
थी
कि
साया
कर
लिया
Shariq Kaifi
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दीवारें
छोटी
होती
थीं
लेकिन
पर्दा
होता
था
तालों
की
ईजाद
से
पहले
सिर्फ़
भरोसा
होता
था
Azhar Faragh
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ऐ
मुझ
को
फ़रेब
देने
वाले
मैं
तुझ
पे
यक़ीन
कर
चुका
हूँ
Athar Nafees
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क़बीले
के
अपने
वफ़ादार
तुम
हो
हो
जनता
की
हामी
या
इनकार
तुम
हो
हक़ीक़त
क़लम
से
निकलती
नहीं
है
ख़रीदा
हुआ
जैसे
अख़बार
तुम
हो
दिखाओगे
तुम
तो
धमक
रंगदारी
है
नेता
सभी
गुंडे
सरकार
तुम
हो
दिखाकर
के
सपने
जो
काटी
हैं
ज़ेबें
गरीबों
के
कैसे
मददगार
तुम
हो
ग़नीमत
है
हम
बोल
देते
हैं
वर्ना
भगत
सब
तुम्हारे
निराकार
तुम
हो
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Shubham Rai 'shubh'
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ख़ूब
प्यारा
किनारा
हो
सकता
है
एक
तिनका
सहारा
हो
सकता
है
आज
ईमान
का
माने
वा'दा
है
क़ौल
उसके
गुज़ारा
हो
सकता
है
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Shubham Rai 'shubh'
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गुज़र
गया
एक
और
बरस
ज़िंदगी
का
मलाल
है
रंज
और
तरस
ज़िंदगी
का
Shubham Rai 'shubh'
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तजरबा
बस
तुम्हें
है
जीने
का
हमने
तो
ज़िंदगी
गँवाई
है
दस्त
के
आप
ही
मुसाफ़िर
हो
ख़ाक
हमने
कहाँ
उड़ाई
है
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Shubham Rai 'shubh'
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जिसका
था
इंतिज़ार
वो
गाड़ी
निकल
गई
पानी
समझ
के
जो
पिया
ताड़ी
निकल
गई
महबूब
को
मियाँ
कल
अनाड़ी
जो
समझा
था
मुझ
सेे
बिछड़ते
ही
वो
खिलाड़ी
निकल
गई
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Shubham Rai 'shubh'
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