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Shubham Rai 'shubh'
guzar gaya ek aur baras zindagi ka
guzar gaya ek aur baras zindagi ka | गुज़र गया एक और बरस ज़िंदगी का
- Shubham Rai 'shubh'
गुज़र
गया
एक
और
बरस
ज़िंदगी
का
मलाल
है
रंज
और
तरस
ज़िंदगी
का
- Shubham Rai 'shubh'
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कितना
भी
दर्द
पिला
दे
ख़ुदा
पी
सकता
हूँ
ज़िन्दगी
हिज्र
से
भर
दे
मिरी
जी
सकता
हूँ
हर
दफ़ा
दिल
पे
ही
खा
के
हुई
है
आदत
ये
बंद
आँखों
से
भी
हर
ज़ख़्म
को
सी
सकता
हूँ
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Faiz Ahmad
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शोर
की
इस
भीड़
में
ख़ामोश
तन्हाई
सी
तुम
ज़िन्दगी
है
धूप
तो
मद-मस्त
पुर्वाई
सी
तुम
चाहे
महफ़िल
में
रहूँ
चाहे
अकेले
में
रहूँ
गूँजती
रहती
हो
मुझ
में
शोख़
शहनाई
सी
तुम
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Kunwar Bechain
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ज़िंदगी
तू
ने
मुझे
क़ब्र
से
कम
दी
है
ज़मीं
पाँव
फैलाऊँ
तो
दीवार
में
सर
लगता
है
Bashir Badr
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मुझे
चाह
थी
किसी
और
की,
प
मुझे
मिला
कोई
और
है
मेरी
ज़िन्दगी
का
है
और
सच,
मेरे
ख़्वाब
सा
कोई
और
है
तू
क़रीब
था
मेरे
जिस्म
के,
बड़ा
दूर
था
मेरी
रूह
से
तू
मेरे
लिए
मेरे
हमनशीं
कोई
और
था
कोई
और
है
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Avtar Singh Jasser
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ज़िंदगी
मेरी
मुझे
क़ैद
किए
देती
है
इस
को
डर
है
मैं
किसी
और
का
हो
सकता
हूँ
Azm Shakri
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बहुत
चल
बसे
यार
ऐ
ज़िंदगी
कोई
दिन
की
मेहमान
तू
रह
गई
Dagh Dehlvi
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धूप
में
निकलो
घटाओं
में
नहा
कर
देखो
ज़िंदगी
क्या
है
किताबों
को
हटा
कर
देखो
Nida Fazli
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कुछ
दिन
से
ज़िंदगी
मुझे
पहचानती
नहीं
यूँँ
देखती
है
जैसे
मुझे
जानती
नहीं
Anjum Rehbar
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तंग
आ
चुके
हैं
कशमकश-ए-ज़िंदगी
से
हम
ठुकरा
न
दें
जहाँ
को
कहीं
बे-दिली
से
हम
Sahir Ludhianvi
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चार
दिन
झूठी
बाहों
के
आराम
से
मेरी
बिखरी
हुई
ज़िंदगी
ठीक
है
दोस्ती
चाहे
जितनी
बुरी
हो
मगर
प्यार
के
नाम
पर
दुश्मनी
ठीक
है
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SHIV SAFAR
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बे-वफ़ा
से
क्या
वफ़ा
करे
कोई
दिल
लगा
के
जब
दग़ा
करे
कोई
नर्क
से
हरगिज़
नहीं
हसद
होगी
दोस्त
ही
जब
डँसा
करे
कोई
हैं
क़रीबी
मेरे
जान
के
दुश्मन
जीते
जी
मेरी
'अज़ा
करे
कोई
मुँह
लगाया
बारी
बारी
से
उसने
होंट
को
उसके
सफ़ा
करे
कोई
दोस्ती
में
ही
दग़ा
किया
सबने
सामने
आकर
जफ़ा
करे
कोई
कोसते
है,
देख
के
तरक़्क़ी
अब
मेरे
हिस्से
में
दु'आ
करे
कोई
शुभ
घड़ी
को
बार
बार
मत
देखो,
अब
नहीं
है
वक़्त
क्या
करे
कोई
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Shubham Rai 'shubh'
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कहानी
तुम्हारी
है
हीरो
हो
तुम
कहाँ
कह
रहे
हम
कि
ज़ीरो
हो
तुम
Shubham Rai 'shubh'
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जो
लगेगा
मौक़ा
तो
पूछेंगे
हम
इश्क़
ये
मरहम
है
तो
किसके
लिए
Shubham Rai 'shubh'
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नसीब
लिखने
वालें
ने
क्या
कमाल
लिखा
है
ज़मीर
पे
मेरे
धब्बा
उसे
रुमाल
लिखा
है
मुरीद
हूँ
मैं
शिक्षा
का
मज़ीद
ज्ञान
नहीं
है
जवाब
मुश्किल
हो
ऐसा
उसे
सवाल
लिखा
है
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Shubham Rai 'shubh'
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इक
सफ़र
में
तन्हा
छोड़ा
जा
चुका
है
ज़ख़्म
देकर
नाता
तोड़ा
जा
चुका
है
इंतिज़ार-ए-इश्क़
करके
क्या
मिलेगा
प्यार
से
जब
राह
छोड़ा
जा
चुका
है
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Shubham Rai 'shubh'
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