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Shubham Rai 'shubh'
sawaal kya hai javaab kya hai
sawaal kya hai javaab kya hai | सवाल क्या है जवाब क्या है
- Shubham Rai 'shubh'
सवाल
क्या
है
जवाब
क्या
है
खुले
न
आँखें
तो
ख़्वाब
क्या
है
ज़बाँ
सही
है
अगर
तुम्हारी
तू
ही
बता
फिर
ख़राब
क्या
है
मिटेंगे
हम
तो
मिटोगे
तुम
भी
या
पूछ
राह-ए-सवाब
क्या
है
- Shubham Rai 'shubh'
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उसी
के
चेहरे
पे
आँखें
हमारी
रह
जाएँ
किसी
को
इतना
भी
क्या
देखना
ज़रूरी
है
Jyoti Azad Khatri
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वो
आँखें
आपके
ग़म
में
नहीं
हुई
हैं
नम
दिया
जलाते
हुए
हाथ
जल
गया
होगा
Shadab Javed
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तुझ
तक
आने
का
सफ़र
इतना
भी
आसाँ
तो
न
था
तूने
फेरी
है
नज़र
हम
सेे
जिस
आसानी
से
Mohit Dixit
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मुझको
ये
नज़र
आया
के
वो
एक
बला
है
कुछ
ख़्वाब
है
कुछ
अस्ल
है
कुछ
तर्ज
-ए-
अदा
है
वो
ग़ैर
की
आग़ोश
में
रहने
लगा
शादाँ
उसको
नहीं
मालूम
के
दिल
मेरा
जला
है
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Navneet krishna
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तेरा
लिक्खा
जो
पढ़ूँ
तो
तेरी
आवाज़
सुनूँ
तेरी
आवाज़
सुनूँ
तो
तेरा
चेहरा
देखूँ
Bhaskar Shukla
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ये
वो
क़बीला
है
जो
हुस्न
को
ख़ुदा
माने
यहाँ
पे
कौन
तेरी
बात
का
बुरा
माने
इशारा
कर
दिया
है
आपकी
तरफ़
मैंने
ये
बच्चे
पूछ
रहे
थे
कि
बे-वफ़ा
माने
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Kushal Dauneria
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एक
चेहरा
है
जो
आँखों
में
बसा
रहता
है
इक
तसव्वुर
है
जो
तन्हा
नहीं
होने
देता
Javed Naseemi
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आज
है
उनको
आना,
मज़ा
आएगा
फिर
जलेगा
ज़माना,
मज़ा
आएगा
तीर
उनकी
नज़र
के
चलेंगे
कई
दिल
बनेगा
निशाना
मज़ा
आएगा
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Bhaskar Shukla
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सब
लोग
जिधर
वो
हैं
उधर
देख
रहे
हैं
हम
देखने
वालों
की
नज़र
देख
रहे
हैं
Dagh Dehlvi
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उस
के
फ़रोग़-ए-हुस्न
से
झमके
है
सब
में
नूर
शम-ए-हरम
हो
या
हो
दिया
सोमनात
का
Meer Taqi Meer
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अभी
तक
जो
न
बदला
आज
बदलेगा
समय
के
साथ
अपना
ताज
बदलेगा
युवा
पीढ़ी
अभी
क़ाबिल
निपुण
भी
है
कभी
इस
देश
का
आमाज
बदलेगा
दबाते
जा
रहे
जो
हक
गरीबों
का
कभी
इक
रोज़
तो
आवाज़
बदलेगा
अभी
थक
हार
कर
बैठो
न
तुम
तो
शुभ
बताओ
किस
तरह
सरताज
बदलेगा
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Shubham Rai 'shubh'
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अलग
जाए
ज़माना
तो
हमें
क्या
ग़म
बहक
जाए
दिवाना
तो
हमें
क्या
ग़म
घमंडी
है,
फ़रेबी
है,
छली
है
वो
नहीं
है
दोस्ताना
तो
हमें
क्या
ग़म
मिले
सब
कुछ
मगर
वो
अब
नहीं,
चाहे
पड़े
सब
कुछ
लुटाना
तो
हमें
क्या
ग़म
निकाला
है
उसे
अब
बा-ख़बर
होकर
नहीं
है
दिल
लगाना
तो
हमें
क्या
ग़म
ख़ुशी
से
लिख
रही
है
ये
क़लम
अब
शुभ
नहीं
अपना
ठिकाना
तो
हमें
क्या
ग़म
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Shubham Rai 'shubh'
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हाल-ए-दिल
भी
बता
नहीं
सकते
दिल
भी
उसका
दुखा
नहीं
सकते
गालों
पे
है
निशान
बोसे
का
साथ
रह
के
मिटा
नहीं
सकते
बज़्म
में
हाथ
थामा
है
उसने
रिश्ता
भी
अब
छुपा
नहीं
सकते
मेरे
हर
बात
पर
वो
लड़ती
है
उस
सेे
सच
सच
बता
नहीं
सकते
धमकी
देती
है
जान
देने
की
हम
उसे
आज़मा
नहीं
सकते
उसने
हमको
दिया
हयात-ए-नौ
हम
वो
क़िस्सा
भुला
नहीं
सकते
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Shubham Rai 'shubh'
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करोगे
याद
तो
बीते
ज़माने
याद
आएँगे
कि
आएगा
नहीं
वो
बस
फ़साने
याद
आएँगे
बचेगा
जब
नहीं
रहबर
न
कोई
राह
निकलेगा
फँसे
नय्या
को
फिर
साहिल
पुराने
याद
आएँगे
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Shubham Rai 'shubh'
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चाहे
जितनी
राह
में
आ
जाए
मुश्किल,
ख़्वाब
को
मेरे
मुक्कमल
तो
करूँँगा
Shubham Rai 'shubh'
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