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Shubham Rai 'shubh'
abhii tak jo na badla aaj badlega
abhii tak jo na badla aaj badlega | अभी तक जो न बदला आज बदलेगा
- Shubham Rai 'shubh'
अभी
तक
जो
न
बदला
आज
बदलेगा
समय
के
साथ
अपना
ताज
बदलेगा
युवा
पीढ़ी
अभी
क़ाबिल
निपुण
भी
है
कभी
इस
देश
का
आमाज
बदलेगा
दबाते
जा
रहे
जो
हक
गरीबों
का
कभी
इक
रोज़
तो
आवाज़
बदलेगा
अभी
थक
हार
कर
बैठो
न
तुम
तो
शुभ
बताओ
किस
तरह
सरताज
बदलेगा
- Shubham Rai 'shubh'
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जंग
तो
ख़ुद
ही
एक
मसअला
है
जंग
क्या
मसअलों
का
हल
देगी
Sahir Ludhianvi
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नए
साल
में
पिछली
नफ़रत
भुला
दें
चलो
अपनी
दुनिया
को
जन्नत
बना
दें
Unknown
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दश्त
छोड़े
हुए
अब
तो
अर्सा
हुआ
मैं
हूँ
मजनूँ
मगर
नाम
बदला
हुआ
मुझको
औरत
के
दुख
भी
पता
हैं
कि
मैं
एक
लड़का
हूँ
बेवा
का
पाला
हुआ
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Rishabh Sharma
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ऐसा
बदला
हूँ
तिरे
शहर
का
पानी
पी
कर
झूट
बोलूँ
तो
नदामत
नहीं
होती
मुझ
को
Shahid Zaki
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कुछ
बात
है
कि
हस्ती
मिटती
नहीं
हमारी
सदियों
रहा
है
दुश्मन
दौर-ए-ज़माँ
हमारा
Allama Iqbal
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याद
आई
जब
मुझे
'फ़रहत'
से
छोटी
थी
बहन
मेरे
दुश्मन
की
बहन
ने
मुझ
को
राखी
बाँध
दी
Ehsan Saqib
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इसलिए
लड़ता
है
मुझ
सेे
मेरा
दुश्मन
उसका
भी
मेरे
सिवा
कोई
नहीं
है
Aves Sayyad
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तू
मोहब्बत
से
कोई
चाल
तो
चल
हार
जाने
का
हौसला
है
मुझे
Ahmad Faraz
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उस
ने
इस
तरह
से
बदला
है
रवय्या
अपना
पूछना
पड़ता
है
हर
वक़्त,
तुम्हीं
हो
ना
दोस्त?
Inaam Azmi
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ज़िन्दगी,
यूँँ
भी
गुज़ारी
जा
रही
है
जैसे,
कोई
जंग
हारी
जा
रही
है
जिस
जगह
पहले
से
ज़ख़्मों
के
निशां
थे
फिर
वहीं
पे
चोट
मारी
जा
रही
है
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Azm Shakri
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इक
कहानी
में
पहले
सँवारा
गया
उस
कहानी
में
फिर
मुझको
मारा
गया
दर्द
भी
बाँटते
हम
किसी
से
मगर
बीच
अपनों
के
सिर
को
उतारा
गया
आप
मन्नत
किए
टूटते
देखकर
है
मिरा
दुख
किसी
घर
का
तारा
गया
घर
को
सहरा
समझते
रहे
उन
दिनों
गाँव
छूटा
लगा
वक़्त
प्यारा
गया
जुगनू
लेकर
भटकते
रहे
दर-ब-दर
शम्स
की
खोज
में
चाँद
तारा
गया
एक
मोती
मगर
हाथ
आया
नहीं
हाथ
से
भी
निकल
अब
किनारा
गया
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Shubham Rai 'shubh'
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सिर
झुकाऊँगा
सबको
भरोसा
न
था
देखकर
मैं
तुझे
ख़ुद-ब-ख़ुद
झुक
गया
Shubham Rai 'shubh'
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साँस
लेने
के
भी
पैसे
देने
होंगे
इस
क़दर
महँगाई
बढ़ती
जा
रही
है
Shubham Rai 'shubh'
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इक
सफ़र
में
तन्हा
छोड़ा
जा
चुका
है
ज़ख़्म
देकर
नाता
तोड़ा
जा
चुका
है
इंतिज़ार-ए-इश्क़
करके
क्या
मिलेगा
प्यार
से
जब
राह
छोड़ा
जा
चुका
है
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Shubham Rai 'shubh'
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ऐसे
कुछ
मस्ताने
निकले
फ़िक्री
को
झुठलाने
निकले
मन-मौजी
हो
भौंरा
देखो
फूलों
को
बहलाने
निकले
दिल
की
मिट्टी
खोदा
जब
तो
वापस
ज़ख़्म
पुराने
निकले
पहले
आग
लगायी
सबने
फिर
सब
आग
बुझाने
निकले
ख़ूब
बनाया
रिश्ता
हमने
वक़्त
पे
सब
बेगाने
निकले
क्या
पाया
क्या
खोया
सोचा
कितने
लोग
सयाने
निकले
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Shubham Rai 'shubh'
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