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Sabir Hussain
ta-kayamat pyaase sab dariyaa rahenge
ta-kayamat pyaase sab dariyaa rahenge | ता-कयामत प्यासे सब दरिया रहेंगे
- Sabir Hussain
ता-कयामत
प्यासे
सब
दरिया
रहेंगे
दरिया
की
तो
तिश्नगी
ख़ुद
कर्बला
हैं
- Sabir Hussain
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बीच
भँवर
से
कश्ती
कैसे
बच
निकली
बहुत
दिनों
तक
दरिया
भी
हैरान
रहा
Madan Mohan Danish
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आँख
आँसू
को
ऐसे
रस्ता
देती
है
जैसे
रेत
गुज़रने
दरिया
देती
है
कोई
भी
उसको
जीत
नहीं
पाया
अब
तक
वैसे
वो
हर
एक
को
मौक़ा
देती
है
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Kafeel Rana
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बहुत
ग़ुरूर
है
दरिया
को
अपने
होने
पर
जो
मेरी
प्यास
से
उलझे
तो
धज्जियाँ
उड़
जाएँ
Rahat Indori
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हमने
तुझ
पे
छोड़
दिया
है
कश्ती,
दरिया,
भँवर,
किनारा
Siddharth Saaz
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दूर
से
ही
बस
दरिया
दरिया
लगता
है
डूब
के
देखो
कितना
प्यासा
लगता
है
Waseem Barelvi
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तिरे
एहसास
में
डूबा
हुआ
मैं
कभी
सहरा
कभी
दरिया
हुआ
मैं
Siraj Faisal Khan
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यहाँ
तुम
देखना
रुतबा
हमारा
हमारी
रेत
है
दरिया
हमारा
Kushal Dauneria
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चाँद
चेहरा
ज़ुल्फ़
दरिया
बात
ख़ुशबू
दिल
चमन
इक
तुम्हें
दे
कर
ख़ुदा
ने
दे
दिया
क्या
क्या
मुझे
Bashir Badr
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कौन
डूबेगा
किसे
पार
उतरना
है
'ज़फ़र'
फ़ैसला
वक़्त
के
दरिया
में
उतर
कर
होगा
Ahmad Zafar
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आपने
मुझको
डुबोया
है
किसी
और
जगह
इतनी
गहराई
कहाँ
होती
है
दरिया
में
Tehzeeb Hafi
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तेरी
दोस्ती
तो
महँगी
पड़ी
है
चारा-गर
ज़ख़्म
हर-सू
अब
मेरा
इंतिज़ार
करते
हैं
Sabir Hussain
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इक
ओर
वो
सलीके
से
काटे
हैं
सर
मिरा
इक
ओर
मैं
कसीदे
पढूँ
शान-ए-यार
में
हरगिज़
नहीं
बनाता
मोहब्बत
में
हिज्र
मैं
होता
अगर
बनाना
मेरे
इख़्तियार
में
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Sabir Hussain
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उम्मीद
ए
विसाल
ए
जांँ
मिसमार
हुई
नहीं
ये
दामन-ए-शब
अभी
दुश्वार
हुई
नहीं
उसने
भी
शब-ए-गुज़श्ता
क़ैद
रखी
हवस
हम
सेे
भी
बदन
की
सरहद
पार
हुई
नहीं
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Sabir Hussain
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हमको
किसी
से
अब
भी
मोहब्बत
तलब
नहीं
इज़्ज़त
तलब
तो
है
पर
अक़ीदत
तलब
नहीं
इतना
हसीन
हैं
वो
तख़य्युल
कि
क्या
कहें
बस
इतना
जान
लो
की
हक़ीक़त
तलब
नहीं
फ़र्त-ए-ख़ुशी
से
अपनी
जो
भी
रश्क
करते
हैं
उनको
तिरी
बनाई
वो
जन्नत
तलब
नहीं
बस
ख़ुद-कुशी
से
बचने
का
ज़रिया
है
शा'इरी
हमको
सुख़न-वरी
से
तो
शोहरत
तलब
नहीं
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Sabir Hussain
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ग़ुस्सा
भी
माँ
का
प्यार
से
तो
कम
नहीं
मैं
मर-मिटूँगा
इतनी
प्यारी
चीख
पर
Sabir Hussain
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