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Sabir Hussain
teri dosti to mahangi padi hai chaara-gar
teri dosti to mahangi padi hai chaara-gar | तेरी दोस्ती तो महँगी पड़ी है चारा-गर
- Sabir Hussain
तेरी
दोस्ती
तो
महँगी
पड़ी
है
चारा-गर
ज़ख़्म
हर-सू
अब
मेरा
इंतिज़ार
करते
हैं
- Sabir Hussain
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दुआए
मांगते
हैं
इसीलिए
अपने
उजड़ने
की
हमें
तो
यार
तेरे
हाथ
से
तामीर
होना
हैं
Vishal Bagh
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जो
दोस्त
हैं
वो
माँगते
हैं
सुलह
की
दु'आ
दुश्मन
ये
चाहते
हैं
कि
आपस
में
जंग
हो
Lala Madhav Ram Jauhar
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सखी
को
हमारी
नज़र
लग
न
जाए
उसे
ख़्वाब
में
रात
भर
देखते
हैं
Sahil Verma
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दुश्मनी
कर
मगर
उसूल
के
साथ
मुझ
पर
इतनी
सी
मेहरबानी
हो
मेरे
में'यार
का
तक़ाज़ा
है
मेरा
दुश्मन
भी
ख़ानदानी
हो
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Akhtar Shumar
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जैसे
पतवार
सफ़ीने
के
लिए
होते
हैं
दोस्त
अहबाब
तो
जीने
के
लिए
होते
हैं
इश्क़
में
कोई
तमाशा
नहीं
करना
होता
अश्क
जैसे
भी
हों
पीने
के
लिए
होते
हैं
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Khalid Nadeem Shani
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हालत
जो
हमारी
है
तुम्हारी
तो
नहीं
है
ऐसा
है
तो
फिर
ये
कोई
यारी
तो
नहीं
है
Ali Zaryoun
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शाम
ढलने
से
फ़क़त
शाम
नहीं
ढलती
है
उम्र
ढल
जाती
है
जल्दी
पलट
आना
मेरे
दोस्त
Ashfaq Nasir
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रातें
किसी
याद
में
कटती
हैं
और
दिन
दफ़्तर
खा
जाता
है
दिल
जीने
पर
माएल
होता
है
तो
मौत
का
डर
खा
जाता
है
सच
पूछो
तो
'तहज़ीब
हाफ़ी'
मैं
ऐसे
दोस्त
से
आज़िज़
हूँ
मिलता
है
तो
बात
नहीं
करता
और
फोन
पे
सर
खा
जाता
है
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Tehzeeb Hafi
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हैराँ
मैं
भी
हूँ
दोस्त
यूँँ
बालों
में
गजरा
देखकर
ये
फूल
आख़िर
कबसे
फूलों
को
पहनने
लग
गया
Neeraj Neer
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कुछ
तो
कर
आदाब-ए-महफ़िल
का
लिहाज़
यार
ये
पहलू
बदलना
छोड़
दे
Waseem Barelvi
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ता-कयामत
प्यासे
सब
दरिया
रहेंगे
दरिया
की
तो
तिश्नगी
ख़ुद
कर्बला
हैं
Sabir Hussain
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इक
ओर
वो
सलीके
से
काटे
हैं
सर
मिरा
इक
ओर
मैं
कसीदे
पढूँ
शान-ए-यार
में
हरगिज़
नहीं
बनाता
मोहब्बत
में
हिज्र
मैं
होता
अगर
बनाना
मेरे
इख़्तियार
में
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Sabir Hussain
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उम्मीद
ए
विसाल
ए
जांँ
मिसमार
हुई
नहीं
ये
दामन-ए-शब
अभी
दुश्वार
हुई
नहीं
उसने
भी
शब-ए-गुज़श्ता
क़ैद
रखी
हवस
हम
सेे
भी
बदन
की
सरहद
पार
हुई
नहीं
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Sabir Hussain
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हमको
किसी
से
अब
भी
मोहब्बत
तलब
नहीं
इज़्ज़त
तलब
तो
है
पर
अक़ीदत
तलब
नहीं
इतना
हसीन
हैं
वो
तख़य्युल
कि
क्या
कहें
बस
इतना
जान
लो
की
हक़ीक़त
तलब
नहीं
फ़र्त-ए-ख़ुशी
से
अपनी
जो
भी
रश्क
करते
हैं
उनको
तिरी
बनाई
वो
जन्नत
तलब
नहीं
बस
ख़ुद-कुशी
से
बचने
का
ज़रिया
है
शा'इरी
हमको
सुख़न-वरी
से
तो
शोहरत
तलब
नहीं
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Sabir Hussain
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फ़र्त-ए-ख़ुशी
से
अपनी
जो
भी
रश्क
करते
हैं
उनको
तिरी
बनाई
वो
जन्नत
तलब
नहीं
Sabir Hussain
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