jab bhi maazi ke mere dard chhalk aate hain | जब भी माज़ी के मेरे दर्द छलक आते हैं

  - ALI ZUHRI
जबभीमाज़ीकेमेरेदर्दछलकआतेहैं
कोरेकाग़ज़पेनएलफ्ज़उतरजातेहैं
अबउदासीमेंगुज़रजातीहैंशा
मेंअपनी
तारेतकतेहुएख़्वाबोंकोनिकलजातेहैं
जबसतातेहैंयेतन्हाईभरेलम्हेंहमें
साथजीनेकोनयादर्दपकड़लातेहैं
मेरेछूलेनेपेबढ़जातीथीसाँसेंजिनकी
कैसेबाँहोंमेंवोग़ैरोंकीसिमटजातेहैं
जबभीसुलगाताहूँसिगरेटतेरीयादोंमें
सबधुएँबनकेतेरेनक़्शउभरआतेहैं
  - ALI ZUHRI
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