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ALI ZUHRI
chupke chupke rab ki saajish ho rahi hai
chupke chupke rab ki saajish ho rahi hai | चुपके चुपके रब की साजिश हो रही है
- ALI ZUHRI
चुपके
चुपके
रब
की
साजिश
हो
रही
है
लग
रहा
है
पूरी
ख़्वाहिश
हो
रही
है
- ALI ZUHRI
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ऐ
आसमान
तेरे
ख़ुदा
का
नहीं
है
ख़ौफ़
डरते
हैं
ऐ
ज़मीन
तेरे
आदमी
से
हम
Unknown
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जिस
ने
इस
दौर
के
इंसान
किए
हैं
पैदा
वही
मेरा
भी
ख़ुदा
हो
मुझे
मंज़ूर
नहीं
Hafeez Jalandhari
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हम
ऐसों
को
बना
कर
के
ख़ुदा
उकता
गया
था
फिर
तेरी
आँखें
बना
डाली
तेरा
चेहरा
बना
डाला
Ankit Maurya
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बाक़ी
न
दिल
में
कोई
भी
या
रब
हवस
रहे
चौदह
बरस
के
सिन
में
वो
लाखों
बरस
रहे
Ameer Minai
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किया
तबाह
तो
दिल्ली
ने
भी
बहुत
'बिस्मिल'
मगर
ख़ुदा
की
क़सम
लखनऊ
ने
लूट
लिया
Bismil Saeedi
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मैं
उस
से
ये
तो
नहीं
कह
रहा
जुदा
न
करे
मगर
वो
कर
नहीं
सकता
तो
फिर
कहा
न
करे
वो
जैसे
छोड़
गया
था
मुझे
उसे
भी
कभी
ख़ुदा
करे
कि
कोई
छोड़
दे
ख़ुदा
न
करे
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Tehzeeb Hafi
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पहले
पानी
को
और
हवा
को
बचाओ
ये
बचा
लो
तो
फिर
ख़ुदा
को
बचाओ
Swapnil Tiwari
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के
'हैलो'
सुनते
ही
कट
कर
दिया
है
उसने
मेरा
फ़ोन
ख़ुदा
का
शुक्र
है
आवाज़
तो
पहचानता
है
वो
Zubair Ali Tabish
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ख़ुदा
ख़ुदको
समझते
हो
तो
समझो
मगर
इक
रोज़
मर
जाना
है
तुमको
Shakeel Azmi
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ये
जानते
हैं
ठीक
नहीं
माँग
रहे
हैं
हम
एक
खंडहर
को
मकीं
माँग
रहे
हैं
सब
माँग
रहे
हैं
ख़ुदास
तेरा
जिस्म
और
हम
हैं,
कि
फ़क़त
तेरी
जबीं
माँग
रहे
हैं
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Siddharth Saaz
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आपके
तोड़े
हुए
फूल
या
छोड़े
हुए
लोग
एक
ही
क़िस्म
की
बर्बादी
यहाँ
पाएँगे
पहले
पहले
तो
लुभाएँगे
तुम्हें
ख़ुशबू
से
धीरे
धीरे
वो
किताबों
में
बिखर
जाएँगे
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ALI ZUHRI
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ज़िंदगी
को
ख़राब
कर
रहा
हूँ
दिल
पे
तारी
अज़ाब
कर
रहा
हूँ
एक
लड़की
को
सोच
सोच
के
मैं
दिल
को
मिस्ल-ए-गुलाब
कर
रहा
हूँ
आदतें
लग
गईं
हैं
मयकशी
की
पानी
को
भी
शराब
कर
रहा
हूँ
हालत-ए-दिल
गुज़ार
कर
ख़ुद
पे
बीते
माज़ी
को
ख़्वाब
कर
रहा
हूँ
और
दुनिया
में
खो
चुका
हूँ
मैं
रम्ज़-ए-पर्दा
हिजाब
कर
रहा
हूँ
मेरे
ग़म
मेरे
हैं
मैं
ही
जानूँ
ख़त्म
सब
सेे
हिसाब
कर
रहा
हूँ
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ALI ZUHRI
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तो
अब
तुम
ही
कहो
जानाँ
मोहब्बत
छोड़
दूँ
कैसे
जो
मेरे
ग़म
की
साथी
है
वो
सिगरेट
तोड़
दूँ
कैसे
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ALI ZUHRI
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हाए
हैरत
है
ज़माने
ने
तुझे
क्या
समझा
एक
आदम
से
निकाली
हुई
हव्वा
समझा
सब
समझते
हैं
तुझे
बिंत-ए-फलाँ
या
ज़ोहजा
फिर
भी
ईसा
को
ख़ुदा
ने
तेरा
बेटा
समझा
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ALI ZUHRI
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मुझे
उस
सेे
नहीं
मतलब
मुझे
वो
भी
समझ
पाया
नहीं
है
मुझे
उसकी
ज़रूरत
थी
उसे
तब
भी
तरस
आया
नहीं
है
ALI ZUHRI
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