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Gulshan
safar ko beech men ham chhodkar waapas chale aate
safar ko beech men ham chhodkar waapas chale aate | सफ़र को बीच में हम छोड़कर वापस चले आते
- Gulshan
सफ़र
को
बीच
में
हम
छोड़कर
वापस
चले
आते
इशारा
लौट
आने
का
किसी
ने
तो
किया
होता
- Gulshan
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न
हम-सफ़र
न
किसी
हम-नशीं
से
निकलेगा
हमारे
पाँव
का
काँटा
हमीं
से
निकलेगा
Rahat Indori
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सफ़र
में
जब
निकल
आए
हो
तो
इतनी
शिकायत
क्यूँ
सड़क
थोड़ी
बहुत
तो
बीच
में
तिरछी
निकलती
है
Pratap Somvanshi
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किया
बादलों
में
सफ़र
ज़िंदगी
भर
ज़मीं
पर
बनाया
न
घर
ज़िंदगी
भर
सभी
ज़िंदगी
के
मज़े
लूटते
हैं
न
आया
हमें
ये
हुनर
ज़िंदगी
भर
मोहब्बत
रही
चार
दिन
ज़िंदगी
में
रहा
चार
दिन
का
असर
ज़िंदगी
भर
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Anwar Shaoor
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सफ़र
में
आख़िरी
पत्थर
के
बाद
आएगा
मज़ा
तो
यार
दिसंबर
के
बाद
आएगा
Rahat Indori
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सफ़र
पीछे
की
जानिब
है
क़दम
आगे
है
मेरा
मैं
बूढ़ा
होता
जाता
हूँ
जवाँ
होने
की
ख़ातिर
Zafar Iqbal
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मेरे
होंठों
के
सब्र
से
पूछो
उसके
हाथों
से
गाल
तक
का
सफ़र
Mehshar Afridi
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सफ़र
के
बाद
भी
ज़ौक़-ए-सफ़र
न
रह
जाए
ख़याल
ओ
ख़्वाब
में
अब
के
भी
घर
न
रह
जाए
Abhishek shukla
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बाग़-ए-बहिश्त
से
मुझे
हुक्म-ए-सफ़र
दिया
था
क्यूँँ
कार-ए-जहाँ
दराज़
है
अब
मिरा
इंतिज़ार
कर
Allama Iqbal
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कोई
तुम्हारा
सफ़र
पर
गया
तो
पूछेंगे
रेल
देख
के
हम
हाथ
क्यूँ
हिलाते
हैं
Tehzeeb Hafi
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मैं
था
सदियों
के
सफ़र
में
'अहमद'
और
सदियों
का
सफ़र
था
मुझ
में
Ahmad Khayal
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तुम
समुंदर
की
बात
करते
हो
यहाँ
आँखों
से
दरिया
बहता
है
Gulshan
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दर्द
जब
हद
से
गुज़र
जाता
है
वो
मुझे
याद
बहुत
आता
है
Gulshan
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झूठा
न
बोलिए
मुझे
झूठा
नहीं
हूँ
मैं
कह
तो
रहा
था
आपसे
अच्छा
नहीं
हूँ
मैं
Gulshan
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भूखे
थे
और
भूखे
ही
रह
जाएँगे
मर
जाएँगे
हाथ
नहीं
फैलाएँगे
Gulshan
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ज़ीस्त
से
बेज़ार
था
सो
मर
गया
बेसबब
किरदार
था
सो
मर
गया
झूठा
वो
इक़रार
था
सो
मर
गया
नाम
का
बस
प्यार
था
सो
मर
गया
जान
माँगी
थी
किसी
ने
प्यार
से
आदमी
दिलदार
था
सो
मर
गया
नफ़रतों
का
खेल
जो
रचता
था
वो
ज़ेहन
से
बीमार
था
सो
मर
गया
बे-वफ़ा
दुनिया
से
रखना
ज़ीस्त
में
आसरा
बेकार
था
सो
मर
गया
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Gulshan
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