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Gulshan
jhoota na bo
jhoota na bo | झूठा न बोलिए मुझे झूठा नहीं हूँ मैं
- Gulshan
झूठा
न
बोलिए
मुझे
झूठा
नहीं
हूँ
मैं
कह
तो
रहा
था
आपसे
अच्छा
नहीं
हूँ
मैं
- Gulshan
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ख़्वाब
में
ही
आना
जाना
रह
गया
याद
बस
गुज़रा
जमाना
रह
गया
मैं
हूँ
तन्हा
सामने
है
आइना
अब
न
कुछ
बाक़ी
बहाना
रह
गया
ले
गया
यादों
के
मौसम
साथ
वो
मुझपे
बस
इक
ख़त
पुराना
रह
गया
रूह
कब
की
जा
चुकी
है
उसके
साथ
अब
तो
बस
ये
तन
जलाना
रह
गया
जोड़कर
खुशियाँ
बनाया
घोंसला
उड़
गया
पंछी
ठिकाना
रह
गया
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Gulshan
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उसकी
यादों
को
दरगुज़र
करके
मर
ना
जाऊँँ
मैं
अब
बिछड़
करके
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मैंने
जब
से
इश्क़
का
ज़ीना
छोड़
दिया
इक
लड़की
ने
खाना
पीना
छोड़
दिया
इस
कमरे
से
धुएँ
के
छल्ले
ग़ायब
हैं
यानी
मैंने
सिगरेट
पीना
छोड़
दिया
जब
से
आँखों
में
धुँधलापन
आया
है
बूढ़ी
माँ
ने
कपड़े
सीना
छोड़
दिया
उसने
मेरी
ख़ातिर
दुनिया
छोड़ी
थी
मैंने
उसकी
ख़ातिर
जीना
छोड़
दिया
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Gulshan
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तुम
सेे
मिलने
के
बाद
ऐ
हमदम
ख़ुद
से
बेज़ार
हो
गया
हूँ
मैं
Gulshan
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बे-ख़याली
में
हम
भी
कहाँ
आ
गए
छोड़
पीछे
तुम्हारे
जहाँ
आ
गए
अब
बुलाना
नहीं
याद
आना
नहीं
फ़ासले
अब
बहुत
दरमियाँ
आ
गए
अब
कोई
आरज़ू
या
गुज़ारिश
नहीं
मोल
इसका
नहीं
हम
कहाँ
आ
गए
जिस्म
की
हद
के
बाहर
निकल
कर
जहाँ
रूह
रौशन
हुई
हम
वहाँ
आ
गए
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Gulshan
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