hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Gulshan
maine jab se ishq ka zeena chhod diya
maine jab se ishq ka zeena chhod diya | मैंने जब से इश्क़ का ज़ीना छोड़ दिया
- Gulshan
मैंने
जब
से
इश्क़
का
ज़ीना
छोड़
दिया
इक
लड़की
ने
खाना
पीना
छोड़
दिया
इस
कमरे
से
धुएँ
के
छल्ले
ग़ायब
हैं
यानी
मैंने
सिगरेट
पीना
छोड़
दिया
जब
से
आँखों
में
धुँधलापन
आया
है
बूढ़ी
माँ
ने
कपड़े
सीना
छोड़
दिया
उसने
मेरी
ख़ातिर
दुनिया
छोड़ी
थी
मैंने
उसकी
ख़ातिर
जीना
छोड़
दिया
- Gulshan
Download Ghazal Image
बोलिए
फिर
क्या
लगाऊँ
होंठ
से
मैं
लीजिए
सिगरेट
पीना
बंद
कल
से
Neeraj Neer
Send
Download Image
12 Likes
कम
से
कम
मैंने
छुपा
ली
देख
कर
सिगरेट
तुम्हें
और
इस
लड़के
से
तुमको
कितनी
इज़्ज़त
चाहिए
Nadeem Shaad
Send
Download Image
40 Likes
सिगरेट
जिसे
सुलगता
हुआ
कोई
छोड़
दे
उस
का
धुआँ
हूँ
और
परेशाँ
धुआँ
हूँ
मैं
Ameeq Hanafi
Send
Download Image
26 Likes
बला
की
ख़ूब-सूरत
वो
उसे
ही
देख
जीता
हूँ
मुझे
उसकी
ज़रूरत
है,
न
मैं
उसका
चहीता
हूँ
कभी
उसको
परेशानी
मिरे
सिगरेट
से
होती
थी
उसे
बोलो
अभी
कोई
कि
मैं
दारू
भी
पीता
हूँ
Read Full
Deepankar
Send
Download Image
15 Likes
क़सम
देता
है
बच्चों
की,
बहाने
से
बुलाता
है
धुआँ
चिमनी
का
हमको
कारख़ाने
से
बुलाता
है
Munawwar Rana
Send
Download Image
24 Likes
देख
तो
दिल
कि
जाँ
से
उठता
है
ये
धुआँ
सा
कहाँ
से
उठता
है
गोर
किस
दिलजले
की
है
ये
फ़लक
शोला
इक
सुब्ह
यां
से
उठता
है
Read Full
Meer Taqi Meer
Send
Download Image
25 Likes
बुरा
मनाया
था
हर
आहट
हर
सरगोशी
का
सोचो
कितना
ध्यान
रखा
उसने
ख़ामोशी
का
तुम
इसका
नुक़सान
बताती
अच्छी
लगती
हो
वरना
हम
को
शौक़
नहीं
है
सिगरेट-नोशी
का
Read Full
Khurram Afaq
Send
Download Image
31 Likes
गुदाज़-ए-इश्क़
नहीं
कम
जो
मैं
जवाँ
न
रहा
वही
है
आग
मगर
आग
में
धुआँ
न
रहा
Jigar Moradabadi
Send
Download Image
28 Likes
तुम
इसका
नुक़सान
बताती
अच्छी
लगती
हो
वरना
हमको
शौक़
नहीं
है
सिगरेट-नोशी
का
Khurram Afaq
Send
Download Image
70 Likes
रिश्तों
को
जब
धूप
दिखाई
जाती
है
सिगरेट
से
सिगरेट
सुलगाई
जाती
है
Ankit Gautam
Send
Download Image
36 Likes
Read More
ज़ीस्त
से
बेज़ार
था
सो
मर
गया
बेसबब
किरदार
था
सो
मर
गया
झूठा
वो
इक़रार
था
सो
मर
गया
नाम
का
बस
प्यार
था
सो
मर
गया
जान
माँगी
थी
किसी
ने
प्यार
से
आदमी
दिलदार
था
सो
मर
गया
नफ़रतों
का
खेल
जो
रचता
था
वो
ज़ेहन
से
बीमार
था
सो
मर
गया
बे-वफ़ा
दुनिया
से
रखना
ज़ीस्त
में
आसरा
बेकार
था
सो
मर
गया
Read Full
Gulshan
Download Image
12 Likes
छोड़
रहे
हो
अच्छा
है
तुम
तो
ये
भी
कर
सकते
हो
मैं
तो
जिस
से
मिल
जाता
हूँ
साथ
निभाने
लगता
हूँ
Gulshan
Send
Download Image
5 Likes
काश
मैं
ये
कमाल
कर
जाता
तेरे
दिल
से
भी
मैं
उतर
जाता
देख
लेते
अगर
वो
मेरी
तरफ़
जाम
ख़ाली
था
मेरा
भर
जाता
तू
अगर
करती
रहनुमाई
मेरी
तू
जिधर
जाती
मैं
उधर
जाता
देखकर
मेरे
दिल
के
ज़ख़्मों
को
मैं
तो
ज़िंदा
हूँ
वो
तो
मर
जाता
Read Full
Gulshan
Download Image
4 Likes
तुम
समुंदर
की
बात
करते
हो
यहाँ
आँखों
से
दरिया
बहता
है
Gulshan
Send
Download Image
12 Likes
यानी
कोई
कमी
नहीं
मुझ
में
यानी
मुझ
में
कमी
उन्हीं
की
है
Gulshan
Send
Download Image
10 Likes
Read More
Akbar Allahabadi
Krishna Bihari Noor
Shariq Kaifi
Mohammad Alvi
Anjum Rehbar
Abhishar Geeta Shukla
Ali Zaryoun
Zehra Nigaah
Amjad Islam Amjad
Asad Bhopali
Get Shayari on your Whatsapp
Andaaz Shayari
Raat Shayari
Musafir Shayari
Aawargi Shayari
Ummeed Shayari