hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Gulshan
chhod rahe ho achha hai tum to ye bhi kar sakte ho
chhod rahe ho achha hai tum to ye bhi kar sakte ho | छोड़ रहे हो अच्छा है तुम तो ये भी कर सकते हो
- Gulshan
छोड़
रहे
हो
अच्छा
है
तुम
तो
ये
भी
कर
सकते
हो
मैं
तो
जिस
से
मिल
जाता
हूँ
साथ
निभाने
लगता
हूँ
- Gulshan
Download Sher Image
इस
से
पहले
कि
तुझे
और
सहारा
न
मिले
मैं
तिरे
साथ
हूँ
जब
तक
मिरे
जैसा
न
मिले
Afkar Alvi
Send
Download Image
70 Likes
जाने
अब
वो
किसके
साथ
निकलता
होगा
रातों
को
जाने
कौन
लगाता
होगा
दो
घंटे
तैयारी
में
Danish Naqvi
Send
Download Image
31 Likes
ज़िंदगी
यूँँ
हुई
बसर
तन्हा
क़ाफ़िला
साथ
और
सफ़र
तन्हा
Gulzar
Send
Download Image
49 Likes
अच्छा
है
दिल
के
साथ
रहे
पासबान-ए-अक़्ल
लेकिन
कभी
कभी
इसे
तन्हा
भी
छोड़
दे
Allama Iqbal
Send
Download Image
28 Likes
रात
दिन
तेरे
साथ
कटते
थे
यार
अब
तुझ
सेे
बात
से
भी
गए
ये
मोहब्बत
भी
किन
दिनों
में
हुई
दिल
मिलाने
थे
हाथ
से
भी
गए
Read Full
Kafeel Rana
Send
Download Image
54 Likes
शर्तें
लगाई
जाती
नहीं
दोस्ती
के
साथ
कीजे
मुझे
क़ुबूल
मिरी
हर
कमी
के
साथ
Waseem Barelvi
Send
Download Image
83 Likes
जो
मेरे
साथ
मोहब्बत
में
हुई
आदमी
एक
दफा
सोचेगा
रात
इस
डर
में
गुजारी
हमने
कोई
देखेगा
तो
क्या
सोचेगा
Tehzeeb Hafi
Send
Download Image
87 Likes
दूर
रहें
तो
याद
बहुत
आती
सब
की
साथ
रहें
तो
घर
में
झगड़े
होते
हैं
Tanoj Dadhich
Send
Download Image
55 Likes
सिर्फ़
तस्वीर
रह
गई
बाक़ी
जिस
में
हम
एक
साथ
बैठे
हैं
Bilal Ameer Ahmad
Send
Download Image
4 Likes
मशवरा
हम
भी
तो
दे
सकते
थे
पर
तेरा
साथ
दे
रहे
थे
हम
Vishal Singh Tabish
Send
Download Image
57 Likes
Read More
सफ़र
को
बीच
में
हम
छोड़कर
वापस
चले
आते
इशारा
लौट
आने
का
किसी
ने
तो
किया
होता
Gulshan
Send
Download Image
10 Likes
काश
मैं
ये
कमाल
कर
जाता
तेरे
दिल
से
भी
मैं
उतर
जाता
देख
लेते
अगर
वो
मेरी
तरफ़
जाम
ख़ाली
था
मेरा
भर
जाता
तू
अगर
करती
रहनुमाई
मेरी
तू
जिधर
जाती
मैं
उधर
जाता
देखकर
मेरे
दिल
के
ज़ख़्मों
को
मैं
तो
ज़िंदा
हूँ
वो
तो
मर
जाता
Read Full
Gulshan
Download Image
4 Likes
मुरझा
गया
गुलाब
तो
अफ़सोस
ये
हुआ
नाहक़
जुदा
किया
उसे
शाख़ों
से
तोड़
कर
Gulshan
Send
Download Image
1 Like
अगन
में
जुदाई
की
जलते
हुए
कटी
रात
करवट
बदलते
हुए
पता
मंज़िलों
का
उन्हीं
को
मिला
चले
जो
भी
गिरते
सँभलते
हुए
मिला
ठोकरों
के
सिवा
और
क्या
सदाक़त
की
राहों
पे
चलते
हुए
जो
आया
है
उसका
है
जाना
अटल
ये
कह
कर
गया
सूर्य
ढलते
हुए
कठिन
इतनी
होगी
जहाँ
की
डगर
न
सोचा
था
घर
से
निकलते
हुए
तक़ाज़ा
समय
का
जो
समझे
नहीं
रहे
हाथ
'गुलशन'
वो
मलते
हुए
Read Full
Gulshan
Download Image
6 Likes
यानी
कोई
कमी
नहीं
मुझ
में
यानी
मुझ
में
कमी
उन्हीं
की
है
Gulshan
Send
Download Image
10 Likes
Read More
Akbar Allahabadi
Krishna Bihari Noor
Shariq Kaifi
Mohammad Alvi
Anjum Rehbar
Abhishar Geeta Shukla
Ali Zaryoun
Zehra Nigaah
Amjad Islam Amjad
Asad Bhopali
Get Shayari on your Whatsapp
Dosti Shayari
Nasha Shayari
Diwali Shayari
Shajar Shayari
Raat Shayari