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Gulshan
kaash main ye kamaal kar jaata
kaash main ye kamaal kar jaata | काश मैं ये कमाल कर जाता
- Gulshan
काश
मैं
ये
कमाल
कर
जाता
तेरे
दिल
से
भी
मैं
उतर
जाता
देख
लेते
अगर
वो
मेरी
तरफ़
जाम
ख़ाली
था
मेरा
भर
जाता
तू
अगर
करती
रहनुमाई
मेरी
तू
जिधर
जाती
मैं
उधर
जाता
देखकर
मेरे
दिल
के
ज़ख़्मों
को
मैं
तो
ज़िंदा
हूँ
वो
तो
मर
जाता
- Gulshan
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कहानी
भी
नहीं
है
दिल
में
कोई
सो
कुछ
भी
इन
दिनों
अच्छा
नहीं
है
मैं
अब
उकता
गया
हूँ
ज़िन्दगी
से
मेरा
जी
अब
कहीं
लगता
नहीं
है
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Ritesh Rajwada
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दिल
में
न
हो
जुरअत
तो
मोहब्बत
नहीं
मिलती
ख़ैरात
में
इतनी
बड़ी
दौलत
नहीं
मिलती
Nida Fazli
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रात
यूँँ
दिल
में
तिरी
खोई
हुई
याद
आई
जैसे
वीराने
में
चुपके
से
बहार
आ
जाए
Faiz Ahmad Faiz
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निभेगी
किस
तरह
दिल
सोचता
है
अजब
लड़की
है
जब
देखो
ख़फ़ा
है
Fuzail Jafri
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हम
मिल
के
आ
गए
मगर
अच्छा
नहीं
लगा
फिर
यूँँ
हुआ
असर
कि
घर
अच्छा
नहीं
लगा
इक
बार
दिल
में
तुझ
सेे
जुदाई
का
डर
बना
फिर
दूसरा
कोई
भी
डर
अच्छा
नहीं
लगा
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Shriyansh Qaabiz
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मैं
जब
सो
जाऊँ
इन
आँखों
पे
अपने
होंट
रख
देना
यक़ीं
आ
जाएगा
पलकों
तले
भी
दिल
धड़कता
है
Bashir Badr
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हम
तो
बचपन
में
भी
अकेले
थे
सिर्फ़
दिल
की
गली
में
खेले
थे
Javed Akhtar
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रातें
किसी
याद
में
कटती
हैं
और
दिन
दफ़्तर
खा
जाता
है
दिल
जीने
पर
माएल
होता
है
तो
मौत
का
डर
खा
जाता
है
सच
पूछो
तो
'तहज़ीब
हाफ़ी'
मैं
ऐसे
दोस्त
से
आज़िज़
हूँ
मिलता
है
तो
बात
नहीं
करता
और
फोन
पे
सर
खा
जाता
है
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Tehzeeb Hafi
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तुम्हें
हम
भी
सताने
पर
उतर
आएँ
तो
क्या
होगा
तुम्हारा
दिल
दुखाने
पर
उतर
आएँ
तो
क्या
होगा
हमें
बदनाम
करते
फिर
रहे
हो
अपनी
महफ़िल
में
अगर
हम
सच
बताने
पर
उतर
आएँ
तो
क्या
होगा
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Santosh S Singh
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न
तेरे
आने
से
मेरा
शबाब
लौटा
है
न
दिल
लगाने
से
मेरा
शबाब
लौटा
है
क़सम
ख़ुदा
की
बताता
हूँ
राज़
ये
तुमको
नहारी
खाने
से
मेरा
शबाब
लौटा
है
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Paplu Lucknawi
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मैंने
जब
से
इश्क़
का
ज़ीना
छोड़
दिया
इक
लड़की
ने
खाना
पीना
छोड़
दिया
इस
कमरे
से
धुएँ
के
छल्ले
ग़ायब
हैं
यानी
मैंने
सिगरेट
पीना
छोड़
दिया
जब
से
आँखों
में
धुँधलापन
आया
है
बूढ़ी
माँ
ने
कपड़े
सीना
छोड़
दिया
उसने
मेरी
ख़ातिर
दुनिया
छोड़ी
थी
मैंने
उसकी
ख़ातिर
जीना
छोड़
दिया
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Gulshan
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झूठा
न
बोलिए
मुझे
झूठा
नहीं
हूँ
मैं
कह
तो
रहा
था
आपसे
अच्छा
नहीं
हूँ
मैं
Gulshan
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बिखर
जाने
की
नौबत
आ
गई
है
कहाँ
लेकर
ये
क़िस्मत
आ
गई
है
मुहब्बत
की
हुई
आमद
है
जब
से
बड़ी
जीने
में
लज़्ज़त
आ
गई
है
वो
सज
कर
रूबरू
आए
हैं
ऐसे
समझ
लो
बस
क़यामत
आ
गई
है
मुहब्बत
का
चला
जादू
है
शायद
तभी
चेहरे
पे
रंगत
आ
गई
है
पराए
हो
गए
अपने
भी
जब
से
हमारे
घर
में
ग़ुर्बत
आ
गई
है
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Gulshan
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उसकी
यादों
को
दरगुज़र
करके
मर
ना
जाऊँँ
मैं
अब
बिछड़
करके
Gulshan
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तुम
सेे
मिलने
के
बाद
ऐ
हमदम
ख़ुद
से
बेज़ार
हो
गया
हूँ
मैं
Gulshan
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