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Gulshan
mere dast-e-tamanna par tumhaare haath ka hona
mere dast-e-tamanna par tumhaare haath ka hona | मेरे दस्त-ए-तमन्ना पर तुम्हारे हाथ का होना
- Gulshan
मेरे
दस्त-ए-तमन्ना
पर
तुम्हारे
हाथ
का
होना
बड़े
हासिद
बनाएगा
बहुत
से
दिल
जलाएगा
- Gulshan
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बन
कर
कसक
चुभती
रही
दिल
में
मिरे
इक
आह
थी
ऐ
हम–नफ़स
मेरे
मुझे
तुझ
सेे
वफ़ा
की
चाह
थी
Dhiraj Singh 'Tahammul'
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किस
तरह
'अमानत'
न
रहूँ
ग़म
से
मैं
दिल-गीर
आँखों
में
फिरा
करती
है
उस्ताद
की
सूरत
Amanat Lakhnavi
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नहीं
ये
फ़िक्र
कोई
रहबर-ए-कामिल
नहीं
मिलता
कोई
दुनिया
में
मानूस-ए-मिज़ाज-ए-दिल
नहीं
मिलता
Asrar Ul Haq Majaz
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गले
मिलना
न
मिलना
तो
तेरी
मर्ज़ी
है
लेकिन
तेरे
चेहरे
से
लगता
है
तेरा
दिल
कर
रहा
है
Tehzeeb Hafi
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हमने
जिस
मासूम
परी
को
अपने
दिल
की
जाँ
बोला
था
उसने
हमको
धोखा
देकर
और
किसी
को
हाँ
बोला
था
सारे
वादे
भूल
गई
तुम
कोई
बात
नहीं
जानेमन
लेकिन
ये
कैसे
भूली
तुम
मेरी
माँ
को
माँ
बोला
था
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Tanoj Dadhich
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वही
शागिर्द
फिर
हो
जाते
हैं
उस्ताद
ऐ
'जौहर'
जो
अपने
जान-ओ-दिल
से
ख़िदमत-ए-उस्ताद
करते
हैं
Lala Madhav Ram Jauhar
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दिल
को
तेरी
चाहत
पे
भरोसा
भी
बहुत
है
और
तुझ
से
बिछड़
जाने
का
डर
भी
नहीं
जाता
Ahmad Faraz
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तुम्हारे
ख़त
को
जलने
में
ज़रा
सा
वक़्त
बाकी
है
ये
दिल
बाहर
निकलने
में
ज़रा
सा
वक़्त
बाकी
है
तुम्हारा
फ़ैसला
है
पास
रुकना
या
नहीं
रुकना
मेरी
क़िस्मत
बदलने
में
ज़रा
सा
वक़्त
बाकी
है
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Tanoj Dadhich
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हर
दुख
का
है
इलाज,
उसे
देखते
रहो
सबकुछ
भुला
के
आज
उसे
देखते
रहो
देखा
उसे
तो
दिल
ने
ये
बे-साख़्ता
कहा
छोड़ो
ये
काम
काज
उसे
देखते
रहो
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Aslam Rashid
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निभेगी
किस
तरह
दिल
सोचता
है
अजब
लड़की
है
जब
देखो
ख़फ़ा
है
Fuzail Jafri
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बे-सबब
मुस्कुराना
ज़रूरी
नहीं
इस
तरह
ग़म
छुपाना
ज़रूरी
नहीं
आँख
में
गर
समुन्दर
बनें
तो
बनें
आँसुओं
को
बहाना
ज़रूरी
नहीं
कौन
है
जो
तुम्हारी
कहानी
सुने
ग़म
सभी
को
दिखाना
ज़रूरी
नहीं
तुम
सफ़र
में
अकेले
चलोगे
यहाँ
साथ
देगा
ज़माना
ज़रूरी
नहीं
बर्क़
गिरती
रहेगी
चमन
में
मगर
ख़ाक
हो
आशियाना
ज़रूरी
नहीं
तीर
भी
अब
चलें
कुछ
नए
ढंग
से
चूक
जाए
निशाना
ज़रूरी
नहीं
हस्ब-ए-मामूल
उसने
है
वा'दा
किया
उसका
वा'दा
निभाना
ज़रूरी
नहीं
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Gulshan
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बड़ा
चालाक
बनकर
के
मेरी
ता'रीफ़
करता
था
ज़रूरत
से
अधिक
ता'रीफ़
भी
अच्छी
नहीं
होती
Gulshan
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मुझे
भी
इतनी
अब
फुर्सत
नहीं
बची
उसे
पाने
की
अब
हसरत
नहीं
बची
Gulshan
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जब
भी
मिलते
हैं
तहे
दिल
से
दु'आ
देते
हैं
ऐसे
होते
हैं
मोहब्बत
को
निभाने
वाले
Gulshan
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मौसम
में
वो
बात
नहीं
है
तेरा
मेरा
साथ
नहीं
है
सूखी
आँखें
दरिया
ख़ाली
यानी
अब
बरसात
नहीं
है
तू
भी
सबके
जैसी
निकली
तुझ
में
भी
कुछ
बात
नहीं
है
तू
दरिया
है
मैं
हूँ
तिनका
मेरी
कुछ
औक़ात
नहीं
है
इश्क़
तो
हर
मज़हब
को
माने
इश्क़
की
कोई
ज़ात
नहीं
है
कटी
पतंगें
लूटे
कैसे
'गुल'
के
लंबे
हाथ
नहीं
है
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Gulshan
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