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Gulshan
mujhe bhi itni ab fursat nahin bachi
mujhe bhi itni ab fursat nahin bachi | मुझे भी इतनी अब फुर्सत नहीं बची
- Gulshan
मुझे
भी
इतनी
अब
फुर्सत
नहीं
बची
उसे
पाने
की
अब
हसरत
नहीं
बची
- Gulshan
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कभी
तो
मुझे
छोड़
जाओगे
तुम
भी
कहोगे
मुझे
अब
कि
फुर्सत
नहीं
है
भला
इस
तरह
क्यूँ
सताने
लगे
हो
कहीं
छोड़
जाने
की
हसरत
नहीं
है
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Tiwari Jitendra
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हम
जानते
तो
इश्क़
न
करते
किसू
के
साथ
ले
जाते
दिल
को
खाक
में
इस
आरज़ू
के
साथ
Meer Taqi Meer
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आरज़ू'
जाम
लो
झिजक
कैसी
पी
लो
और
दहशत-ए-गुनाह
गई
Arzoo Lakhnavi
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आरज़ू
वस्ल
की
रखती
है
परेशाँ
क्या
क्या
क्या
बताऊँ
कि
मेरे
दिल
में
है
अरमाँ
क्या
क्या
Akhtar Shirani
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ग़म-ए-हयात
ने
आवारा
कर
दिया
वर्ना
थी
आरज़ू
कि
तिरे
दर
पे
सुब्ह
ओ
शाम
करें
Majrooh Sultanpuri
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फिर
किसी
के
सामने
चश्म-ए-तमन्ना
झुक
गई
शौक़
की
शोख़ी
में
रंग-ए-एहतराम
आ
ही
गया
Asrar Ul Haq Majaz
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हमें
इस
मिट्टी
से
कुछ
यूँँ
मुहब्बत
है
यहीं
पे
निकले
दम
दिल
की
ये
हसरत
है
हमें
क्यूँ
चाह
उस
दुनिया
की
हो
मौला
हमारी
तो
इसी
मिट्टी
में
जन्नत
है
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Harsh saxena
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मैं
सो
रहा
हूँ
तेरे
ख़्वाब
देखने
के
लिए
ये
आरज़ू
है
कि
आँखों
में
रात
रह
जाए
Shakeel Azmi
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हम
आज
राह-ए-तमन्ना
में
जी
को
हार
आए
न
दर्द-ओ-ग़म
का
भरोसा
रहा
न
दुनिया
का
Waheed Quraishi
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बहाने
और
भी
होते
जो
ज़िंदगी
के
लिए
हम
एक
बार
तिरी
आरज़ू
भी
खो
देते
Majrooh Sultanpuri
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तुझे
पाकर
ज़माने
की
वफ़ा
अच्छी
नहीं
लगती
सिवा
तेरे
किसी
की
भी
अदा
अच्छी
नहीं
लगती
Gulshan
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यूँँ
तो
कोई
ख़ुशी
नहीं
लेकिन
आदतन
मुस्कुराता
रहता
हूँ
Gulshan
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झूठा
न
बोलिए
मुझे
झूठा
नहीं
हूँ
मैं
कह
तो
रहा
था
आपसे
अच्छा
नहीं
हूँ
मैं
Gulshan
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ज़ीस्त
से
बेज़ार
था
सो
मर
गया
बेसबब
किरदार
था
सो
मर
गया
झूठा
वो
इक़रार
था
सो
मर
गया
नाम
का
बस
प्यार
था
सो
मर
गया
जान
माँगी
थी
किसी
ने
प्यार
से
आदमी
दिलदार
था
सो
मर
गया
नफ़रतों
का
खेल
जो
रचता
था
वो
ज़ेहन
से
बीमार
था
सो
मर
गया
बे-वफ़ा
दुनिया
से
रखना
ज़ीस्त
में
आसरा
बेकार
था
सो
मर
गया
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Gulshan
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आजकल
हाल
मेरा
ऐसा
है
किसी
बंज़र
जमीन
जैसा
है
Gulshan
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