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Gulshan
mausam men vo baat nahin hai
mausam men vo baat nahin hai | मौसम में वो बात नहीं है
- Gulshan
मौसम
में
वो
बात
नहीं
है
तेरा
मेरा
साथ
नहीं
है
सूखी
आँखें
दरिया
ख़ाली
यानी
अब
बरसात
नहीं
है
तू
भी
सबके
जैसी
निकली
तुझ
में
भी
कुछ
बात
नहीं
है
तू
दरिया
है
मैं
हूँ
तिनका
मेरी
कुछ
औक़ात
नहीं
है
इश्क़
तो
हर
मज़हब
को
माने
इश्क़
की
कोई
ज़ात
नहीं
है
कटी
पतंगें
लूटे
कैसे
'गुल'
के
लंबे
हाथ
नहीं
है
- Gulshan
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न
तीर्थ
जा
कर
न
धर्म
ग्रंथो
का
सार
पा
कर
सुकूँ
मिला
है
मुझे
तो
बस
तेरा
प्यार
पा
कर
ग़रीब
बच्चे
किताब
पढ़
कर
सँवर
रहे
हैं
अमीर
लड़के
बिगड़
रहे
हैं
दुलार
पा
कर
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Alankrat Srivastava
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कभी
अल्लाह
मियाँ
पूछेंगे
तब
उनको
बताएँगे
किसी
को
क्यूँ
बताएँ
हम
इबादत
क्यूँ
नहीं
करते
Farhat Ehsaas
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मुझ
से
कहा
जिब्रील-ए-जुनूँ
ने
ये
भी
वही-ए-इलाही
है
मज़हब
तो
बस
मज़हब-ए-दिल
है
बाक़ी
सब
गुमराही
है
Majrooh Sultanpuri
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ये
मय-कदा
है
यहाँ
हैं
गुनाह
जाम-ब-दस्त
वो
मदरसा
है
वो
मस्जिद
वहाँ
मिलेगा
सवाब
Ali Sardar Jafri
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मज़हब
से
मेरे
क्या
तुझे
मेरा
दयार
और
मैं
और
यार
और
मिरा
कारोबार
और
Meer Taqi Meer
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पहले
पहल
तो
लड़
लिए
अल्लाह
से
मगर
अब
पेश
आ
रहे
हैं
बड़ी
आजिज़ी
से
हम
Amaan Pathan
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अब
तो
मज़हब
कोई
ऐसा
भी
चलाया
जाए
जिस
में
इंसान
को
इंसान
बनाया
जाए
Gopaldas Neeraj
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अल्लाह
तेरे
हाथ
है
अब
आबरू-ए-शौक़
दम
घुट
रहा
है
वक़्त
की
रफ़्तार
देख
कर
Bismil Azimabadi
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मज़हब
नहीं
सिखाता
आपस
में
बैर
रखना
हिन्दी
हैं
हम
वतन
है
हिन्दोस्ताँ
हमारा
Allama Iqbal
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कितने
हसीं
हो
माशा-अल्लाह
तुम
पे
मोहब्बत
ख़ूब
जचेगी
Zubair Ali Tabish
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अपना
किरदार
हम
दिखा
देंगे
चोट
खाकर
भी
मुस्कुरा
देंगे
तेरे
ख़्वाबों
में
ऐ
मेरे
हमदम
रंग
उल्फ़त
के
हम
मिला
देंगे
इश्क़
की
रहगुज़र
में
आ
जाओ
अपनी
पलकों
को
हम
बिछा
देंगे
उनको
लाओ
बुला
के
ऐ
लोगों
वो
ही
बीमार
को
दवा
देंगे
सुनके
दीवाने
वो
हुए
जिसको
वो
ग़ज़ल
तुमको
हम
सुना
देंगे
उठके
जाने
की
ज़िद
करोगे
तब
तुमको
अपनी
क़सम
दिला
देंगे
जीत
लो
दिल
अगर
गरीबों
के
दामन-ए-दिल
से
यह
दु'आ
देंगे
साथ
तेरा
अगर
मिले
'गुलशन'
आशियाँ
प्यार
से
सजा
देंगे
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Gulshan
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तुझे
पाकर
ज़माने
की
वफ़ा
अच्छी
नहीं
लगती
सिवा
तेरे
किसी
की
भी
अदा
अच्छी
नहीं
लगती
Gulshan
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भूखे
थे
और
भूखे
ही
रह
जाएँगे
मर
जाएँगे
हाथ
नहीं
फैलाएँगे
Gulshan
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बिखरने
सँवरने
को
जी
चाहता
है
कि
फिर
जीने
मरने
को
जी
चाहता
है
किया
आज
तक
जो
नहीं
ज़िन्दगी
में
वो
सब
कर
गुज़रने
को
जी
चाहता
है
किसी
की
निगाहों
की
गहराइयों
में
मेरा
भी
उतरने
को
जी
चाहता
है
लगे
फीकी
फीकी
सी
जो
ज़ीस्त
उस
में
नये
रंग
भरने
को
जी
चाहता
है
किसी
की
किए
बिन
कोई
फ़िक्र
'गुलशन'
करो
वो
जो
करने
को
जी
चाहता
है
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Gulshan
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कहा
किसने
कि
वो
सुनता
नहीं
है
अलग
है
बात
कुछ
कहता
नहीं
है
वो
अपने
आप
में
रहता
है
गुमसुम
किसी
से
खुल
के
वो
मिलता
नहीं
है
अकेले
चलने
की
आदत
है
उसको
किसी
के
साथ
वो
चलता
नहीं
है
लगे
पत्थर
सा
रक्खे
मोम
का
दिल
वो
अच्छा
है
मगर
लगता
नहीं
है
वो
धोक़े
खा
चुका
अब
तो
किसी
पर
भरोसा
रत्ती
भर
करता
नहीं
है
उसी
ही
वक़्त
लौटा
दे
है
दुगना
वो
एहसां
तक
कभी
रखता
नहीं
है
वो
तो
'गुलशन'
है
बाँटे
नूर
सबको
किसी
के
नूर
से
जलता
नहीं
है
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Gulshan
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