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Gulshan
kaha kisne ki vo sunta nahin hai
kaha kisne ki vo sunta nahin hai | कहा किसने कि वो सुनता नहीं है
- Gulshan
कहा
किसने
कि
वो
सुनता
नहीं
है
अलग
है
बात
कुछ
कहता
नहीं
है
वो
अपने
आप
में
रहता
है
गुमसुम
किसी
से
खुल
के
वो
मिलता
नहीं
है
अकेले
चलने
की
आदत
है
उसको
किसी
के
साथ
वो
चलता
नहीं
है
लगे
पत्थर
सा
रक्खे
मोम
का
दिल
वो
अच्छा
है
मगर
लगता
नहीं
है
वो
धोक़े
खा
चुका
अब
तो
किसी
पर
भरोसा
रत्ती
भर
करता
नहीं
है
उसी
ही
वक़्त
लौटा
दे
है
दुगना
वो
एहसां
तक
कभी
रखता
नहीं
है
वो
तो
'गुलशन'
है
बाँटे
नूर
सबको
किसी
के
नूर
से
जलता
नहीं
है
- Gulshan
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झुकी
झुकी
सी
नज़र
बे-क़रार
है
कि
नहीं
दबा
दबा
सा
सही
दिल
में
प्यार
है
कि
नहीं
Kaifi Azmi
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दिल
में
और
दुनिया
में
अब
नहीं
मिलेंगे
हम
वक़्त
के
हमेशा
में
अब
नहीं
मिलेंगे
हम
Jaun Elia
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जब
ज़रा
रात
हुई
और
मह
ओ
अंजुम
आए
बार-हा
दिल
ने
ये
महसूस
किया
तुम
आए
Asad Bhopali
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आज
है
उनको
आना,
मज़ा
आएगा
फिर
जलेगा
ज़माना,
मज़ा
आएगा
तीर
उनकी
नज़र
के
चलेंगे
कई
दिल
बनेगा
निशाना
मज़ा
आएगा
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Bhaskar Shukla
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वही
शागिर्द
फिर
हो
जाते
हैं
उस्ताद
ऐ
'जौहर'
जो
अपने
जान-ओ-दिल
से
ख़िदमत-ए-उस्ताद
करते
हैं
Lala Madhav Ram Jauhar
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ये
कहते
हो
तिरे
जाने
से
दिल
को
चैन
आएगा
तो
जाता
हूँ,
ख़ुदा
हाफ़िज़!
मगर
तुम
झूठ
कहते
हो
Zubair Ali Tabish
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हम
लबों
से
कह
न
पाए
उन
से
हाल-ए-दिल
कभी
और
वो
समझे
नहीं
ये
ख़ामुशी
क्या
चीज़
है
Nida Fazli
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तिरंगा
दिल
में
है
लबों
पे
हिंदुस्तान
रखता
हूँ
सिपाही
हूँ
हथेली
पे
मैं
अपनी
जान
रखता
हूँ
Shashank Shekhar Pathak
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कहानी
भी
नहीं
है
दिल
में
कोई
सो
कुछ
भी
इन
दिनों
अच्छा
नहीं
है
मैं
अब
उकता
गया
हूँ
ज़िन्दगी
से
मेरा
जी
अब
कहीं
लगता
नहीं
है
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Ritesh Rajwada
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तुम्हारे
ख़त
को
जलने
में
ज़रा
सा
वक़्त
बाकी
है
ये
दिल
बाहर
निकलने
में
ज़रा
सा
वक़्त
बाकी
है
तुम्हारा
फ़ैसला
है
पास
रुकना
या
नहीं
रुकना
मेरी
क़िस्मत
बदलने
में
ज़रा
सा
वक़्त
बाकी
है
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Tanoj Dadhich
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बिखर
जाने
की
नौबत
आ
गई
है
कहाँ
लेकर
ये
क़िस्मत
आ
गई
है
मुहब्बत
की
हुई
आमद
है
जब
से
बड़ी
जीने
में
लज़्ज़त
आ
गई
है
वो
सज
कर
रूबरू
आए
हैं
ऐसे
समझ
लो
बस
क़यामत
आ
गई
है
मुहब्बत
का
चला
जादू
है
शायद
तभी
चेहरे
पे
रंगत
आ
गई
है
पराए
हो
गए
अपने
भी
जब
से
हमारे
घर
में
ग़ुर्बत
आ
गई
है
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Gulshan
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दिल
की
हस्ती
मिटाता
जा
रहा
हूँ
उसकी
यादें
भुलाता
जा
रहा
हूँ
Gulshan
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मौसम
में
वो
बात
नहीं
है
तेरा
मेरा
साथ
नहीं
है
सूखी
आँखें
दरिया
ख़ाली
यानी
अब
बरसात
नहीं
है
तू
भी
सबके
जैसी
निकली
तुझ
में
भी
कुछ
बात
नहीं
है
तू
दरिया
है
मैं
हूँ
तिनका
मेरी
कुछ
औक़ात
नहीं
है
इश्क़
तो
हर
मज़हब
को
माने
इश्क़
की
कोई
ज़ात
नहीं
है
कटी
पतंगें
लूटे
कैसे
'गुल'
के
लंबे
हाथ
नहीं
है
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Gulshan
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बड़ा
चालाक
बनकर
के
मेरी
ता'रीफ़
करता
था
ज़रूरत
से
अधिक
ता'रीफ़
भी
अच्छी
नहीं
होती
Gulshan
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मुझे
भी
इतनी
अब
फुर्सत
नहीं
बची
उसे
पाने
की
अब
हसरत
नहीं
बची
Gulshan
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