agar kahii bhi mile muhabbat zaraa sa bachna saraab hogii | अगर कहीं भी मिले मुहब्बत ज़रा सा बचना सराब होगी

  - Asad Akbarabadi
अगरकहींभीमिलेमुहब्बतज़रासाबचनासराबहोगी
ख़ुशीसेदूरीबनायेरखनानहींतोआदतख़राबहोगी
येकैसेहमनेशजरथेपाऐकिज़ीस्तभरसिर्फ़ख़ारआऐ
जोतुममिलेतोलगाकिशायदयेज़िंदगीअबगुलाबहोगी
वोसुरमईनीलीआँखेंपीछेनक़ाबकेक्याग़ज़बकिएथीं
येसोचोक्याहोगाउसकाजिसकेलिएवोजबबे-नक़ाबहोगी
शराबकोयेग़ुरूरहैवोजिसेभीछूलेबनेशराबी
कभीतुम्हारेलबोंनेछूलीनशेमेंउसदिनशराबहोगी
येआजकलकेनऐदिवानेदोचारजुमलेलिखेंगेतुमपर
मगरअसदजबलिखेगातुमकोतोकमसेकमइककिताबहोगी
  - Asad Akbarabadi
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