qatre bhi gire aankh se paara bhi bahut tha | क़तरे भी गिरे आँख से पारा भी बहुत था

  - Asad Akbarabadi
क़तरेभीगिरेआँखसेपाराभीबहुतथा
वोशख़्समुझेजानसेप्याराभीबहुतथा
यूँँछोड़केजानेकीज़रूरततोनहींथी
दिलतोड़नेकोएकइशाराभीबहुतथा
चुपचापज़ुबांँसेमेरीशिकवाहैतुम्हेंक्यूँ
रोरोकेनिगाहोंनेपुकाराभीबहुतथा
पलकोंपेसजाएथेकईमीठेसेसपने
जोख़्वाबगिराआँखसेख़ाराभीबहुतथा
उसकोबिठाकेसाथमेंइतनाउड़ोतुम
जोआजतुम्हाराहैहमाराभीबहुतथा
जोहोगयासोठीकहैज़िदछ़ोड़'असद'अब
जानेदेउसेउसकाख़साराभीबहुतथा
  - Asad Akbarabadi
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