gar nibhaana munaasib nahin | गर निभाना मुनासिब नहीं

  - Asad Akbarabadi
गरनिभानामुनासिबनहीं
हक़जतानामुनासिबनहीं
ज़ब्तक्यूँकररहेहोमियाँ
क्यायेशानामुनासिबनहीं
दुश्मनीदोस्तीठीकहै
प्यारनानामुनासिबनहीं
लज़्ज़ते-ज़ीस्ततोख़ैरक्या
आब-ओ-दानामुनासिबनहीं
कबतलकगालआगेकरें
भइज़मानामुनासिबनहीं
मानसम्मानअपनीजगह
दुमहिलानामुनासिबनहीं
जिनकोआतानहींकुछतोफिर
मुँहचलानामुनासिबनहीं
क्यानहींहोरहाआजकल
येबहानामुनासिबनहीं
बोलनाहैतोबोलोसाफ़
बड़बड़ानामुनासिबनहीं
वोखिलौनानहींहैअसद
मनचलानामुनासिबनहीं
  - Asad Akbarabadi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy