ghar nibhaana munaasib nahin | ग़र निभाना मुनासिब नहीं

  - Asad Akbarabadi
ग़रनिभानामुनासिबनहीं
हक़जतानामुनासिबनहीं
ज़ब्तक्यूँकररहेहोमियाँ
क्यायेशानामुनासिबनहीं
दुश्मनीदोस्तीठीकहै
प्यारनानामुनासिबनहीं
लज़्ज़ते-ज़ीस्ततोख़ैरक्या
आबो-दानामुनासिबनहीं
सब्ज़रखनेपड़ेंगेशजर
बसलगानामुनासिबनहीं
कबतलकगालआगेकरें
भइज़मानामुनासिबनहीं
मानसम्मानअपनीजगह
दुमहिलानामुनासिबनहीं
जिनकोआतानहींकुछतोफिर
मुँहचलानामुनासिबनहीं
क्यानहींहोरहाआजकल
येबहानामुनासिबनहीं
वोख़िलौनानहींहैअसद
मनचलानामुनासिबनहीं
  - Asad Akbarabadi
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