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Tiwari Jitendra
qataro men khada hona nahin aata
qataro men khada hona nahin aata | क़तारो में खड़ा होना नहीं आता
- Tiwari Jitendra
क़तारो
में
खड़ा
होना
नहीं
आता
अना
के
साथ
समझौता
नहीं
आता
- Tiwari Jitendra
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बे-ख़ुदी
ले
गई
कहाँ
हम
को
देर
से
इंतिज़ार
है
अपना
Meer Taqi Meer
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होश
वालों
को
ख़बर
क्या
बे-ख़ुदी
क्या
चीज़
है
इश्क़
कीजे
फिर
समझिए
ज़िंदगी
क्या
चीज़
है
Nida Fazli
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कम
अज़
कम
इक
ज़माना
चाहता
हूँ
कि
तुम
को
भूल
जाना
चाहता
हूँ
ख़ुदारा
मुझ
को
तन्हा
छोड़
दीजे
मैं
खुल
कर
मुस्कुराना
चाहता
हूँ
सरासर
आप
हूँ
मद्दे
मुक़ाबिल
ख़ुदी
ख़ुद
को
हराना
चाहता
हूँ
मेरे
हक़
में
उरूस-ए-शब
है
मक़्तल
सो
उस
से
लब
मिलाना
चाहता
हूँ
ये
आलम
है,
कि
अपने
ही
लहू
में
सरासर
डूब
जाना
चाहता
हूँ
सुना
है
तोड़ते
हो
दिल
सभों
का
सो
तुम
से
दिल
लगाना
चाहता
हूँ
उसी
बज़्म-ए-तरब
की
आरज़ू
है
वही
मंज़र
पुराना
चाहता
हूँ
नज़र
से
तीर
फैंको
हो,
सो
मैं
भी
जिगर
पर
तीर
खाना
चाहता
हूँ
चराग़ों
को
पयाम-ए-ख़ामुशी
दे
तेरे
नज़दीक
आना
चाहता
हूँ
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Kazim Rizvi
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तेरी
ख़ता
नहीं
जो
तू
ग़ुस्से
में
आ
गया
पैसे
का
ज़ो'म
था
तेरे
लहजे
में
आ
गया
सिक्का
उछालकर
के
तेरे
पास
क्या
बचा
तेरा
ग़ुरूर
तो
मेरे
काँसे
में
आ
गया
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Mehshar Afridi
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चादर
की
इज़्ज़त
करता
हूँ
और
पर्दे
को
मानता
हूँ
हर
पर्दा
पर्दा
नइँ
होता
इतना
मैं
भी
जानता
हूँ
Ali Zaryoun
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तू
मोहब्बत
नहीं
समझती
है
हम
भी
अपनी
अना
में
जलते
हैं
इस
दफा
बंदिशें
ज़ियादा
हैं
छोड़
अगले
जनम
में
मिलते
हैं
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Ritesh Rajwada
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हर
किसी
से
ही
मुहब्बत
माँगता
है
दिल
तो
अब
सब
सेे
अक़ीदत
माँगता
है
सीख
आया
है
सलीक़ा
ग़ुफ़्तगू
का
मुझ
सेे
मेरा
दोस्त
इज़्ज़त
माँगता
है
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बहुत
ग़ुरूर
है
दरिया
को
अपने
होने
पर
जो
मेरी
प्यास
से
उलझे
तो
धज्जियाँ
उड़
जाएँ
Rahat Indori
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दिन
रात
मय-कदे
में
गुज़रती
थी
ज़िंदगी
'अख़्तर'
वो
बे-ख़ुदी
के
ज़माने
किधर
गए
Akhtar Shirani
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ख़ुदी
को
कर
बुलंद
इतना
कि
हर
तक़दीर
से
पहले
ख़ुदा
बंदे
से
ख़ुद
पूछे
बता
तेरी
रज़ा
क्या
है
Allama Iqbal
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हमेशा
दर्द
मत
देना
किसी
को
तुम
कभी
तो
'जीत'
पा
कर
जीत
मिलती
है
Tiwari Jitendra
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उम्र
भर
के
लिए
दिल
लगाया
गया
दोस्त
कह
के
मुझे
जाँ
बताया
गया
मैं
समझता
रहा
सिर्फ़
दिल
तक
हूँ
मैं
घर
के
हर
आइने
में
सजाया
गया
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Tiwari Jitendra
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अगर
जो
लाश
को
दरिया
में
भी
फेंका
कहीं
दरिया
न
जाए
डूब
ख़ुद
मुझ
में
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Tiwari Jitendra
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वक़्त
अक्सर
मलाल
देता
है
दोस्त
कह
बात
टाल
देता
है
मैं
उसे
जब
जवाब
देता
हूँ
वो
पलट
कर
सवाल
देता
है
देख
कर
देर
तक
उसे
अब
तो
चाँद
ख़ुद
दिल
निकाल
देता
है
जब
सुख़न
बज़्म
छोड़
देती
है
जीत
फिर
जान
डाल
देता
है
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Tiwari Jitendra
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कभी
दिल
लग
गया
था
कुछ
बरस
पहले
किताबों
से
गुलाबों
को
किताबों
में
अगर
रखना
यही
कहना
Tiwari Jitendra
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