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Tiwari Jitendra
kabhi dil lag gaya tha kuchh baras pahle kitaabon se
kabhi dil lag gaya tha kuchh baras pahle kitaabon se | कभी दिल लग गया था कुछ बरस पहले किताबों से
- Tiwari Jitendra
कभी
दिल
लग
गया
था
कुछ
बरस
पहले
किताबों
से
गुलाबों
को
किताबों
में
अगर
रखना
यही
कहना
- Tiwari Jitendra
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गुलाबों
के
होंटों
पे
लब
रख
रहा
हूँ
उसे
देर
तक
सोचना
चाहता
हूँ
Zubair Rizvi
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काँटों
में
घिरे
फूल
को
चूम
आएगी
लेकिन
तितली
के
परों
को
कभी
छिलते
नहीं
देखा
Parveen Shakir
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फोन
भी
आया
तो
शिकवे
के
लिए
फूल
भी
भेजा
तो
मुरझाया
हुआ
Balmohan Pandey
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वो
सिर्फ़
फूल
नहीं
ख़ुद
में
ही
क्यारी
था
हमारा
शे'र
तुम्हारी
ग़ज़ल
पे
भारी
था
सब
उसके
चाहने
वाले
सलाम
करते
थे
मैं
उस
हसीन
का
सब
सेे
बड़ा
पुजारी
था
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Vishnu virat
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तमाम
शहर
की
ख़ातिर
चमन
से
आते
हैं
हमारे
फूल
किसी
के
बदन
से
आते
हैं
Farhat Ehsaas
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किस
काम
के
वो
फूल
जो
सबने
दिए
मुझे
बेहतर
है
तेरे
हाथ
का
ख़ंजर
लगे
मुझे
Vikram Sharma
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सो
देख
कर
तेरे
रुख़्सार-ओ-लब
यक़ीं
आया
कि
फूल
खिलते
हैं
गुलज़ार
के
अलावा
भी
Ahmad Faraz
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उड़ाने
पर
जो
आ
जाऊँ
उड़ा
दूँ
होश
दुनिया
के
मगर
मैं
फूल
से
तितली
उड़ा
सकता
नहीं
यारों
Divy Kamaldhwaj
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यूँँ
लगे
दोस्त
तिरा
मुझ
से
ख़फ़ा
हो
जाना
जिस
तरह
फूल
से
ख़ुशबू
का
जुदा
हो
जाना
Qateel Shifai
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हाथ
काँटों
से
कर
लिए
ज़ख़्मी
फूल
बालों
में
इक
सजाने
को
Ada Jafarey
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आप
अच्छे
हैं
बताओ
सबको
मैं
बुरा
हूँ
तो
मुझे
जाने
दो
Tiwari Jitendra
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दर्द
दिल
के
चलो
मिटाते
हैं
दीप
अब
प्यार
का
जलाते
हैं
आपसे
प्रेम
हो
गया
है
अब
आपको
देखने
को
आते
हैं
आँख
तुम
शर्म
से
झुकाती
हो
हम
तुम्हें
ख़्वाब
में
सजाते
हैं
तुम
कली
हो
हसीन
बाग़ों
की
हम
तुम्हें
देख
दिल
लगाते
हैं
'जीत'
ऐसे
न
मुस्कुराओ
तुम
लोग
पागल
तुम्हें
बताते
हैं
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Tiwari Jitendra
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अब
मेरी
बात
न
टाली
जाए
कोई
तस्वीर
बना
ली
जाए
हैं
बहुत
ज़ख़्म
मगर
यादें
हैं
जिस्म
से
जान
निकाली
जाए
हम
तो
भौंरे
थे
हमें
मतलब
था
फूल
आए
या
तो
माली
जाए
पहले
ही
याद
ने
मारा
मुझको
अब
कोई
याद
न
पाली
जाए
फ़ोन
बजते
ही
उठा
लेना
है
कॉल
कोई
भी
न
ख़ाली
जाए
जीत
को
सिर्फ़
मुहब्बत
ही
हो
होंठ
से
होंठ
पे
लाली
जाए
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Tiwari Jitendra
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जीत
अब
हार
तो
नहीं
सकता
डर
मुझे
मार
तो
नहीं
सकता
Tiwari Jitendra
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वक़्त
के
साथ
गुज़ारा
करना
दिल
को
तुम
जीतके
हारा
करना
Tiwari Jitendra
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