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Sachin kumar
ye kaatil nigaahen ye surmaa ghazab ka
ye kaatil nigaahen ye surmaa ghazab ka | ये क़ातिल निगाहें ये सुरमा ग़ज़ब का
- Sachin kumar
ये
क़ातिल
निगाहें
ये
सुरमा
ग़ज़ब
का
है
नागिन
से
केशों
में
गजरा
ग़ज़ब
का
- Sachin kumar
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उस
के
क़त्ल
पे
मैं
भी
चुप
था
मेरा
नंबर
अब
आया
मेरे
क़त्ल
पे
आप
भी
चुप
हैं
अगला
नंबर
आपका
है
Nawaz Deobandi
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ये
उसकी
मेहरबानी
है
वो
घर
में
ही
सँवरती
है
निकल
आए
जो
महफ़िल
में
तो
क़त्ल-ए-आम
हो
जाए
Ashraf Jahangeer
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पूछे
हैं
वजह-ए-गिरिया-ए-ख़ूनी
जो
मुझ
सेे
लोग
क्या
देखते
नहीं
हैं
सब
उस
बे-वफ़ा
का
रंग
Meer Taqi Meer
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तेग़-बाज़ी
का
शौक़
अपनी
जगह
आप
तो
क़त्ल-ए-आम
कर
रहे
हैं
Jaun Elia
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पूरी
कायनात
में
एक
क़ातिल
बीमारी
की
हवा
हो
गई
वक़्त
ने
कैसा
सितम
ढाया
कि
दूरियाँ
ही
दवा
हो
गईं
Unknown
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हम
आह
भी
करते
हैं
तो
हो
जाते
हैं
बदनाम
वो
क़त्ल
भी
करते
हैं
तो
चर्चा
नहीं
होता
Akbar Allahabadi
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इक
अव्वल
दर्जे
का
पाक
इक
माहिर
है
मन
तो
तुझ
में
रमता
है
दिल
काफ़िर
फिर
है
अपनी
सोचो
क़त्ल
तुम्हें
करना
भी
है
बन्दे
का
तो
क्या
है
बन्दा
हाज़िर
है
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Vikram Gaur Vairagi
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यूँँ
बे-तरतीब
ज़ख़्मों
ने
बताया
राज़
क़ातिल
का
सलीके
से
जो
मेरा
क़त्ल
गर
होता
तो
क्या
होता
Vikram Gaur Vairagi
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क़त्ल
से
पहले
वो
हर
शख़्स
के
दिल
की
हसरत
पूछ
लेता
था
मगर
पूरी
नहीं
करता
था
Vishnu virat
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गुजर
चुकी
जुल्मते
शब-ए-हिज्र,
पर
बदन
में
वो
तीरगी
है
मैं
जल
मरुंगा
मगर
चिरागों
के
लो
को
मध्यम
नहीं
करूँगा
यह
अहद
लेकर
ही
तुझ
को
सौंपी
थी
मैंने
कलबौ
नजर
की
सरहद
जो
तेरे
हाथों
से
कत्ल
होगा
मैं
उस
का
मातम
नहीं
करूँगा
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Tehzeeb Hafi
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कई
फूल
हैं
बाग़
में
हँस
रहे
पर
नज़र
में
मेरी
तेरा
चर्बा
ग़ज़ब
का
Sachin kumar
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निगाहों
से
ये
जो
इशारे
हुए
हैं
इशारों
ने
दीवाने
मारे
हुए
हैं
कई
हुस्न
वाले
मुझे
चाहते
थे
मगर
मेरी
जाँ
हम
तुम्हारे
हुए
हैं
तेरे
लौटने
की
ख़बर
थी
मिली
जब
सड़क
तब
से
हम
यूँँ
निहारे
हुए
हैं
हुई
तुम
हो
किशमिश
असर
है
नगर
का
इधर
हिज्र
में
हम
छुहारे
हुए
हैं
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Sachin kumar
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नगर
का
तौर
है
ऐसा
कि
रहते
बंद
दरवाज़े
हमारे
गाँव
के
चौखट
ने
ताले
भी
नहीं
देखे
Sachin kumar
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तुझे
देख
कर
सोचता
हूँ
मैं
अक्सर
नज़ारा
ख़ुदा
ने
बनाया
ग़ज़ब
का
Sachin kumar
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मौसम
की
ये
पहली
बारिश
बे-ग़ैरत
मनमौजी
बारिश
बाकी
सबको
भाती
है
पर
मुझको
तो
तड़पाती
बारिश
मुझको
दुश्मन
सी
लगती
है
तेरे
तन
को
छूती
बारिश
चाहत
है
बस
बरसे
हरदम
मुझपे
तेरे
लब
की
बारिश
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Sachin kumar
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